एक दंपति पर उनके अपने बेटे की संपत्ति ही हड़पने का आरोप लगा है। बेटे को यह संपत्ति उसके दादा ने वसीयत की थी। एसआईटी भूमि की जांच पर बेटे के आरोप सही पाए गए, जिसके आधार पर अब बेटे की तहरीर पर पटेलनगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
एसआईटी (भूमि) ने यह जांच शुभांकर नेगी निवासी साईं लोक कॉलोनी कारबारी ग्रांट की शिकायत पर की थी। शिकायत के अनुसार शुभाकंर को वर्ष 2006 में उसके दादा ने कुछ जमीन रजिस्टर्ड वसीयत की थी। उस वक्त शुभांकर सात वर्ष का था। समय बीतता गया और शुभांकर पढ़ाई लिखाई में व्यस्त रहने लगा।
इस बीच वर्ष 2014 में उसके माता पिता ने नीरज शर्मा और कुलदीप शर्मा के साथ मिलकर एक षडयंत्र रचा। उन्होंने उस वक्त शुभांकर का फर्जी डीएल और आधार आदि बनवाकर उसे बालिग दर्शा दिया। इसके बाद वे उसे किसी बहाने से कचहरी ले गए, जहां उससे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराकर यह संपत्ति अपने नाम करा ली।
इस बात का पता उसे उस वक्त चला जब जुलाई माह में उसके पिता विरेंद्र सिंह नेगी और माता मनोरमा नेगी ने उसे घर से निकाल दिया। यही नहीं अगले दिन समाचार पत्र में एक इस्तिहार भी छपवाया कि शुभांकर को संपत्ति से बेदखल किया जाता है। यह देखकर शुभांकर की बड़ी बहन ने उसे आश्रय दिया। इस पर जब वह एक वकील से मिला तो उसने यह सब बातें विस्तार से बताई।
इंस्पेक्टर पटेलनगर प्रदीप बिष्ट ने बताया कि शुभांकर के आरोपों की जांच में पुष्टि हुई है। इस आधार पर विरेंद्र नेगी, मनोरमा नेगी, कुलदीप शर्मा और नीरज शर्मा के खिलाफ जालसाजी व धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।