हाईकोर्ट व सरकार के आदेश के बाद भी कुछ स्कूल संचालक अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव बना रहे हैं। फीस न देने पर बच्चों को ऑनलाइन क्लास से भी वंचित कर रहे हैं। नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एवं स्टूडेंट राइट्स (एनएपीएसआर) ने इस पर आक्रोश जताते हुए कहा कि शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए। साथ ही उन्होंने ऐसे स्कूलों और विभाग के खिलाफ कोर्ट के साथ ही मानवाधिकार आयोग से शिकायत करने का निर्णय लिया है।
नेहरू कॉलोनी स्थित एसोसिएशन के कार्यालय में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश है कि कोरोना संकट में कोई भी स्कूल बच्चों की फीस जमा न होने पर शिक्षा से वंचित नहीं कर सकता है और न ही अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव बना सकता है। इसके लिए हाईकोर्ट ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया है।
इसके बाद भी कुछ स्कूल अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव बना रहे और न देने पर बच्चों को ऑनलाइन क्लास से वंचित कर रहे हैं। इसकी शिकायत एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग के साथ ही बाल आयोग से भी की है, लेकिन शिक्षा विभाग और बाल आयोग केवल स्कूलों को नोटिस देने तक ही सीमित हैं। वक्ताओं ने कहा कि संज्ञान में आया है कि कुछ स्कूलों को विभागों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण वह अभिभावकों को डरा रहे हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आरिफ खान ने कहा कि कोर्ट के आदेश और शासनादेश के अनुसार विभाग को इन स्कूलों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवानी चाहिए, लेकिन विभाग केवल नोटिस देने तक ही सीमित है। अब एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि विभागों, सरकार के खिलाफ अभिभावकों के शोषण को लेकर मानवाधिकार आयोग, सेवा का अधिकार अधिनियम एवं कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राज गीता शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष रवि त्यागी, प्रदेश महासचिव नदीम खान, प्रदेश सचिव ऐश्वर्य गौरव, नवदीप गर्ग, किरण बिष्ट, पूजा गर्ग, सोमपाल सिंह, भुवन पालीवाल आदि मौजूद थे।