दो दिन के कार्य बहिष्कार के बाद उपनलकर्मियों ने बुधवार को प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इससे खासकर अस्पतालों, बिजली दफ्तरों समेत विभिन्न विभागों में व्यवस्थाएं बाधित हुईं। कर्मचारियों ने 26 फरवरी को सचिवालय घेराव की चेतावनी दी है।
बुधवार को सहस्त्रधारा रोड स्थित धरनास्थल पर प्रदेशभर से उपनल कर्मचारी जुटे। उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कुशाग्र जोशी ने कहा कि अगर सरकार उपनलकर्मियों की मांग को नहीं मानती तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
बुधवार को राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ के महासचिव बीएस रावत, चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा सेवाएं उत्तराखंड के पदाधिकारियों ने धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, उपाध्यक्ष नेलसन अरोड़ा और महामंत्री सुनील अधिकारी ने कहा कि सरकार को शीघ्र मांग मान लेनी चाहिए। धरने में उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कुशाग्र जोशी, महासचिव हेमंत रावत, विनोद गोदियाल, महेश भट्ट, विद्यासागर धस्माना आदि शामिल रहे।
काम पर लौटें, तभी हो सकती है वार्ता: पाहवा
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के प्रबंध निदेशक ब्रिगेडियर पीएस पाहवा (सेनि) ने उपनल कर्मचारियों काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इसके बाद ही वार्ता हो सकती है। बताया कि मामला न्यायालय में चल रहा है। ब्रिगेडियर पाहवा ने कहा कि दस महीने पहले ही उपनलकर्मियों का वेतन बढ़ाया गया था। विभिन्न विभाग अब शिकायत करने लगे हैं कि उपनल कर्मचारी बार-बार आंदोलन कर रहे हैं। जिससे विभागों का काम प्रभावित हो रहा है। ऐसे में उपनल से कर्मचारियों से कैसे काम लिया जाए। उपनलकर्मी जितने दिन अनुपस्थित रहेंगे, उनका उतने दिन का वेतन काटा जा सकता है।
हड़ताल से मरीजों की आफत
उपनल कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा आफत सरकारी अस्पतालों में मरीजों को हो रही है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था कर मरीजों को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया है।
बुधवार को भी मरीज विभिन्न जांच कराने और अन्य जरूरी कार्यों के लिए परेशान रहे। अस्पताल में ओपीडी के पर्चे भी कंप्यूटर की बजाय हाथ से ही बनाने पड़े। बुधवार को अस्पताल प्रशासन ने पैथोलॉजी लैब में ही काउंटर बनाकर सीधे बिल कटाने की व्यवस्था की, जिससे पैथोलॉजी जांच शुरू की जा सकी। वहीं, कोरोना जांच की सुविधा बायाकेमिस्ट्री लैब में शुरू की गई। हालांकि, इस व्यवस्था से 50 तक ही सैंपल लिए जा रहे हैं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि बुधवार को लगभग 75 जांच की गई हैं।
वहीं, ओपीडी, आईपीडी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन की सुविधा भी चल रही है। वहीं, अस्पताल में पीआरडी के माध्यम से रखे गए कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रही। नारेबाजी से भर्ती मरीजों को हो रही दिक्कत को देखते हुए शुक्रवार को यहां पुलिस का पहरा रहा। इस पर कर्मचारियों ने केवल सांकेतिक रूप से धरना दिया। वहीं, देर शाम पूर्व विधायक राजकुमार और कांग्रेस महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना से मिला। प्राचार्य ने बताया कि इस बारे में शासन से लगातार पत्राचार और मौखिक वार्ता की जा रही है। शासन से जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे उसके मुताबिक निर्णय लिया जाएगा।