इस पूरे मामले में होटल स्टाफ की लापरवाही भी सामने आ रही है। होटल में कमरा नंबर 321 में सुनील कुमार निवासी ऊधमसिंह नगर ठहरा हुआ था। रजिस्टर में यह भी एंट्री नहीं थी कि उसके साथ कोई और ठहरा था। होटल स्टाफ ने सुनील की आईडी के रूप में ड्राइविंग लाइसेंस लिया, लेकिन युवती की कोई आईडी अपने पास नहीं रखी।
...तो क्या शव छुपा कर चुपचाप चला गया कातिल?
शव दो गद्दों के बीच में रजाइयों से ढका हुआ था। शुरूआत में जब होटल स्टाफ और परिजन कमरे में दाखिल हुए तो उन्हें मुस्कान का पता ही नहीं चला। शुरूआती पड़ताल में माना जा रहा है कि कातिल मुस्कान की हत्या कर शव को यहां छुपाकर चुपचाप होटल से बाहर चला गया।
आखिर क्या है दो रजिस्टरों का राज?
दरअसल, जब पुलिस वहां पर पूछताछ कर रही थी तो काउंटर पर रजिस्टर रखा हुआ था। इस रजिस्टर में किसी विकास शर्मा का नाम लिखा था। उसी के नाम पर कमरा नंबर 321 दर्ज था। वह वहां पर 49वां ग्राहक था। लेकिन, उसके आगे न तो पता साफ-साफ लिखा था और न ही समय। इसमें कुछ देर बाद जब वहां पर एक रजिस्टर लाया गया तो पता चला कि कमरा नंबर 321 सुनील कुमार के नाम पर था।
लेकिन, यहां भी न तो पता साफ लिखा था और न ही समय। पहला रजिस्टर आधा भरा हुआ था। उस पर सीरियल नंबर भी लिखा हुआ था। लेकिन, स्टाफ बाद में जो दूसरा रजिस्टर लाया उसके आखिरी कुछ पन्नों पर ही यह नाम आदि दर्ज थे। हालांकि, इनमें से कौनसा रजिस्टर सही है यह तो जांच में पता चलेगा। लेकिन, प्रथमदृष्टया तो यह चालबाजी के अलावा कुछ नहीं दिख रही है।