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टूट रहा शिक्षा का मंदिर: बस्ती के बीच मौजूद स्कूल को तोड़ने की कवायद; 300 बच्चों की पढ़ाई पर मंडरा रहा खतरा

Mon, 27 Jul 2026 05:26 PM IST
Alka Tyagi संजय चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून

सार

विद्यालय में पढ़ रहे 300 से ज्यादा बच्चों का भविष्य विद्यालय के टूटने से खतरे में आ जाएगा। इसके अलावा बस्ती की अच्छी खासी सड़क को तोड़ा जा रहा है।
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तोड़ा जा रहा स्कूल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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डालनवाला क्षेत्र की सूरज बस्ती के लोगों की पीड़ा इस समय उनके बच्चों की छूटती शिक्षा है। करीब 38 साल पहले रखी गई शिक्षा के मंदिर की बुनियाद को अब सिस्टम खोदने में लगा हुआ है। लोगों का कहना है कि विद्यालय में पढ़ रहे 300 से ज्यादा बच्चों का भविष्य विद्यालय के टूटने से खतरे में आ जाएगा। इसके अलावा बस्ती की अच्छी खासी सड़क को तोड़ा जा रहा है इससे लोगों को परेशानी हो रही है।

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इसके अलावा भी बस्ती की कई समस्याएं हैं। जलभराव, पेयजल संकट और शौचालय। यहां मात्र एक शौचालय बना था। उसको भी नगर निगम ने ध्वस्त कर दिया। लोगों का कहना है इन सरकारी भवनों को तोड़ने के पीछे फ्लड प्लेन जोन का बहाना बनाया जा रहा है यदि ऐसा था तो शौचालय, सामुदायिक भवन और सरकारी विद्यालयों को पहले सरकार ने यहां क्यों बनाया और लाखों रुपये खर्च करने के बाद अब उनको क्यों तोड़ा जा रहा है।

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गरीब बच्चों के सामने शिक्षा का संकट

स्थानीय लोगों का कहना है जब विद्यालय और नदी के बीच बस्ती बसी हुई है तो ऐसे में विद्यालय को क्यों तोड़ा जा रहा है। इस सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चे मलिन बस्ती के हैं और आसपास कोई दूसरा सरकारी स्कूल भी नहीं है। ऐसे में यदि स्कूल को तोड़ा गया तो इन बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा? क्योंकि ये गरीब बच्चे हैं और निजी स्कूल में पढ़ने में न तो सक्षम है और न ही किसी अन्य दूसरी जगह सरकारी स्कूल तक जाने के लिए इनके पास ट्रांसपोर्ट की कोई सुविधा है।

जब बस्ती बसी है तो स्कूल को क्यों तोड़ा जा रहा है, यह गलत है।
 - जयकुमार
यहां पर गरीब लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं। यदि स्कूल को तोड़ा गया तो उनका पढ़ाई छूट सकती है।
- ओमप्रकाश
बस्ती में एकमात्र शौचालय था। उस शौचालय को भी तोड़ा गया है। ऐसे में स्थानीय लोगों के सामने अब दिक्कत खड़ी हो गई है।
- ज्ञानेश्वर शर्मा

हमने कई बार अधिकारियों को समस्याओं के संबंध में अवगत कराया लेकिन समाधान नहीं हुआ।
- डॉ. एचपी यादव
साफ-सफाई बेहतर होनी चाहिए और जो सड़क यहां पर तोड़ी जा रही है उसको जल्द ही बनाया जाए।
- अमीर जहां

1988 में इस स्कूल की नींव रखी गई थी, 300 से ज्यादा बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं। इनकी पढ़ाई छूटने का जिम्मेदार कौन होगा? किसी भी सूरत में यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- राजकुमार, पूर्व विधायक
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