इस मामले में पिछले दिनों ईडी ने भी जांच शुरू की थी। 19 मई को ईडी ने सुद्धोवाला जेल से उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की थी। 23 मई को यादव को चार दिन की कस्टडी में लिया गया। इस दौरान लखनऊ और देहरादून में पूछताछ की गई। सभी संपत्तियों की मौके पर जाकर ईडी ने जांच की। ईडी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यादव की संपत्तियों को अटैच करने की जानकारी दी गई है। ईडी के अनुसार, अवैध रूप से कमाए गए धन से यादव ने परिवार के सदस्यों के नाम पर चार जमीनें और एक फ्लैट खरीदा था।
इसके अलावा लखनऊ में अपने घर, जनता विद्यालय, गुडंबा, लखनऊ, भवन समूह और स्व. रामकरन दादा मेमोरियल ट्रस्ट गाजीपुर की इमारतों को बनाने में भी इस धन का प्रयोग किया है। ईडी ने उनके परिवार के सदस्यों की 18.33 करोड़ रुपये की चल और लगभग 2.03 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अटैच किया है। अचल संपत्तियों में विभिन्न बैंकों में परिवार के नाम की एफडी शामिल हैं। जबकि, अचल संपत्तियों में पैतृक गांव की जमीन शामिल है।
और भी संपत्तियां हो सकती हैं अटैच
ईडी अभी यादव की संपत्तियों की जांच कर रही है। ईडी के अनुसार, उनकी और भी संपत्तियों को अटैच किया जा सकता है। बता दें कि रामविलास यादव ने देहरादून में भी छह प्लॉट खरीदे थे। वह उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे। आईएएस बनने के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे। कई साल तक उत्तराखंड में समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव भी रहे।