इसके कुछ दिन बाद हरजीत माता-पिता को सेवा के लिए अपने घर डोईवाला ले गई। लेकिन, यहां एक महीने बाद ही उसने दोनों को मारपीट कर निकाल दिया। इस बीच उसने कुछ कागजात पर उनके हस्ताक्षर भी कराए थे। वे दोनों फिर पटेलनगर वाले मकान में ही रहने लगे।
बीते अगस्त महीने में हरजीत उनके घर आई और कहने लगी कि यह मकान उसके नाम हो गया है। उसके साथ उनका नाती अमन भी था। इसके बाद महिला ने अपने एक परिचित के माध्यम से रजिस्ट्रार ऑफिस से जानकारी ली तो पता चला कि यह मकान उसकी बेटी ने धोखे से दान में लिखवा लिया है। इस मामले में हरजीत और उसके भांजे (वृद्धा का नाती) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
12 लाख रुपये धोखे से निकाले
बुजुर्ग महिला ने पुलिस को बताया कि हरजीत जो 11 लाख रुपये जमा कराने के लिए ले गई थी, उनमें से छह लाख रुपये ही उसने उनके नाम पर जमा किए। जबकि, पांच लाख रुपये उसने अपनी बेटी के नाम कर दिए थे। यह सब पैसे भी उसने धोखाधड़ी कर निकाल लिए। यही नहीं पिता के खाते से भी 12 लाख रुपये धोखाधड़ी कर निकाल लिए।