32 साल पुराने दून वैली नोटिफिकेशन में बदलाव होने से दून में उद्योगों की राह तो आसान हो गई है, लेकिन नए उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों में अब जमीन नहीं बची है। ऐसे में दून वैली में निवेश के इच्छुक उद्योगपतियों को मायूस लौटना पड़ रहा है।
राज्य गठन के बाद दून वैली में 330 एकड़ में फार्मा सिटी, आईटी पार्क, सेलाकुई, पटेलनगर, लांघा रोड, रानी पोखरी और विकासनगर में इंडस्ट्रियल क्षेत्र विकसित किए गए थे। यहां 250 छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हैं। दून वैली नोटिफिकेशन में बदलाव होने से दून में उद्योग लगाने के लिए बड़ी संख्या में निवेशक आवेदन कर रहे हैं, लेकिन जमीन की कमी आड़े आ रही है।
सेलाकुई, सेंट्रल होपटाउन, लांघ रोड कुआंवाला, माजरी ग्रांट, लालतप्पड़, मोहब्बेवाला, शंकरपुर में निजी औद्योगिक क्षेत्र हैं, लेकिन यहां भी जमीन उपलब्ध नहीं है।
वर्तमान में दून में स्थित मौजूद उद्योग और पूंजी निवेश
क्षेत्र - उद्योग - पूंजी निवेश (करोड़ में) - रोजगार
फार्मा सिटी व आईटी पार्क - 26 - 135.79 - 1331
यूपीएसआईडीसी सेलाकुई -166 - 206.97 - 5294
सहकारी आस्थान पटेलनगर - 25 - 7.22 - 268
राजकीय आस्थान पटेलनगर - 27 - 4.47 - 259
रानी पोखरी - 02 - 047 - 15
विकासनगर- 04 - 1.71 - 77
निजी क्षेत्र के औद्योगिक संस्थान
क्षेत्र - उद्योग - पूंजी निवेश - रोजगार
सेलाकुई - 55 - 123.63 - 2634
सेंट्रल होपटाउन- 69 - 175.65 - 2639
लांघा रोड छरबा - 45 - 102 - 1601
कुआंवाला - 12 - 16 - 324
मोहब्बेवाला - 42 - 69.21 - 1625
सारा इंडस्ट्रीज शंकरपुर - 23 - 92.65 - 1026
आईटी पार्क सहस्रधारा - 12 - 10.29 - 288
माजरी ग्रांट लालतप्पड़ - 34 - 84.52 - 1728
दून वैली नोटिफिकेशन में बदलाव के बाद दून में उद्योगों खासकर छोटे उद्योगों की राह आसान हो गई है, लेकिन दून वैली में जमीन की कमी है। लिहाजा, सरकार को एक और आईटी पार्क विकसित करने के साथ ही लालतप्पड़ में मल्टीस्टोरी इंडस्ट्रियल हब आदि बनाने चाहिए, जिससे छोटी जगह पर अधिक से अधिक इंडस्ट्री लगाई जा सके। इसकी मांग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन काफी लंबे समय से कर रही है।
- पंकज गुप्ता, अध्यक्ष इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड
दून वैली नोटिफिकेशन में बदलाव के बाद कई प्रतिबंधित उद्योग के लिए राह आसान हो गई है। औद्योगिक संस्थानों के लिए जमीन की कमी है, लेकिन प्रयास किया जाएगा कि इनके लिए नए क्षेत्र विकसित किए जाएं।
- शिखर सक्सेना, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र