पहले से मौजूद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, राज्यमंत्री धन सिंह रावत और नवनिर्वाचित पार्षदों का हाथ जोड़कर अभिवादन का सिलसिला करबी 25 मिनट तक चला। नए मेयर वीआईपी सर्किट से निकलकर पीछे बैठी जनता का एक-एक कर धन्यवाद करना भी नहीं भूले। जुबां खामोश थी। चेहरे की मुस्कान और जुड़े हाथ जीत का शुक्रिया अदा कर रहे थे।
शपथ के तय समय 11 बजे से ठीक पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने पुराने साथी गामा के साथ खुशी के पल बांटने पहुंचे। दोनों की नजरें मिलीं और अधरों पर विजयी मुस्कान तैर गई। दोस्ती का हक अदा करने के बाद ऐतिहासिक दिन का यह मिलन सीएम और गामा की एक दूसरे के प्रति निष्ठा की कहानी भी कह गया। सीएम खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे थे तो गामा विनम्र, कृतज्ञ और संकोची बने रहे।
मुख्यमंत्री और अजय भट्ट के बीच बैठे मेयर को सांसद रमेश पोखरियाल निशंक किताब भेंट करने से नहीं चूके। साथ मेें मंत्री मदन कौशिक, विधायक विनोद चमोली, हरबंस कपूर, उमेश शर्मा काऊ, राजेश शुक्ला, खजानदास थे। एक घंटे से सिर्फ मुस्कान के जरिये अपने भावों का इजहार कर रहे मेयर ने विश्वासपूर्वक शपथ लेने के बाद चुप्पी तोड़ी। पटाखे और नारेबाजी के शोर के बीच माइक पकड़ सीएम समेत सभी बड़े नेताओं को विनम्रतापूर्वक मंच पर बुलाया। फूलों के बड़े हार के अंदर सभी ने एकजुटता दिखाकर फोटो खिंचवाई।
गामा ने संदेश दे दिया कि मिलकर चलेंगे। सीएम समेत मौजूद वीआईपी के विदा लेते ही मेयर सुनील उनियाल गामा धक्कामुक्की भरे रेले में कई बार घिरे। तब तक निगम परिसर की गुनगुनी धूप थोड़ी तीखी हो चली थी, लेकिन भारी शोरगुल के बीच 30 मिनट तक अलग-अलग चरणों में मीडिया के सवालों की बौछार पर मेयर शांत भाव से जवाब देते रहे। एक तपे खांटी नेता की तरह। चेहरे पर कोई शिकन नहीं।
इसके बाद परिवार और समर्थकों संग आए नवनिर्वाचित पार्षदों का मंच से पांडाल तक सेल्फी का दौर चला। मेयर मंच पर पार्षदों के साथ फोटो सेशन में शामिल हुए। अपने पहले शो में मेयर गामा गंभीर और निश्चल नजर आए। कोई तड़क-भड़क नहीं। एकदम शालीन, न कोई स्टाइल न बनावट। सरल और सहज अभिव्यक्ति। इधर, रणसिंगा और ढोल दमाऊ की गूंज भी थम गई।
सुबह से तैनात पुलिसकर्मी भी खड़े-खड़े सुस्ताने लगे। भोजन कर चुके लोगों ने भी घर की राह पकड़ी। जाड़ों की गुनगुनी धूप सर्द हवाओं के पारे में घुलने लगी। नगर निगम परिसर में सांझ ढलने लगी थी, लेकिन शहर के प्रथम व्यक्ति की जिम्मेदारियों की एक नई सुबह आकार ले रही थी। शपथ के बाद झुकी-झुकी नजर वाले गामा की पलकों में अब एक नया ख्वाब सजने लगा। एक छोटी सी आशा... सुंदर देहरादून और अपने देहरादून की।