‘सीएम साहब, नगर निगम में शिकायतें नहीं सुनी जाती हैं।’ यह बात हम नहीं बल्कि ऊपर दिए मामले खुद बयां कर रहे हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनता दर्शन में करीब 365 लोगों की समस्याएं सुनीं।
उन्होंने अफसरों को एक हफ्ते में समस्याओं का समाधान करने के आदेश दिए, लेकिन इसके ठीक उलट नगर निगम में समस्याओं को सुना ही नहीं जाता है। इससे लोगों में रोष है।
देहरादून के लोगों का कहना है कि यदि शिकायत प्रकोष्ठ बनाया है तो एक्शन क्यों नहीं लिया जाता है? अधिकारी शिकायती पत्र तो ले लेते हैं, पर कार्रवाई नहीं करते। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। बता दें कि निगम में वर्ष 2012 में तत्कालीन नगर आयुक्त सुभाष कुमार ने ऑनलाइन ग्रिवांस रिड्रेसल सेल बनाई गई थी।
जिसके तहत नगर निगम से संबंधित किसी भी समस्या का समाधान दो से पांच दिन के भीतर होना था। इसी तरह वर्कशॉप में भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट शिकायत प्रकोष्ठ बनाया गया, लेकिन अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के चलते दोनों सेल ठीक से काम नहीं कर रही हैं। हालांकि अधिकारी समस्या दूर करने का दावा कर रहे हैं।
केस एक:- द्रोणपुरी में करीब तीन साल पहले बिना कारण बताए सफाई व्यवस्था के तहत दिया गया वाहन वापस ले लिया गया। पार्षद बाबूराम दर्जनों बार अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन नगर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा उन्हें लगातार टरकाया जा रहा है। मजबूरन लोग बिंदाल में कूड़ा डाल रहे हैं।
केस दो:- लक्ष्मण चौक स्थित कुछ क्षेत्रों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था नहीं है। बीते छह माह से लगातार शिकायत के बाद भी कूड़ा उठान नहीं हुआ। ऐसे में परेशान लोगों ने 100 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से प्राइवेट कूड़ा कलेक्शन एजेंसी से अनुबंध कर लिया।
केस तीन:- राजधानी में आवारा कुत्ते बढ़ती समस्या बनकर उभरे हैं। इससे परेशान पार्षद और पीड़ितों ने बीते तीन माह में कई बार निगम पहुंचकर अधिकारियों से गुहार लगाई। भरोसा दिया गया कि उनकी समस्या दो दिन में दूर हो जाएगी, लेकिन महीनों बाद भी दो दिन पूरे नहीं हुए।
ये हैं शिकायत प्रकोष्ठ के नंबर
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट शिकायत प्रकोष्ठ - 18001804206
ग्रिवांस रिड्रेसल सेल - 18001804216
दोनों ही शिकायत प्रकोष्ठ चल रहे हैं। दोनों में ही शिकायतों को दर्ज कर उनका समाधान किया जाता है।
- रवनीत चीमा, नगर आयुक्त