जेपीआरआई ने रिपोर्ट तैयार कर ली, सार्वजनिक नहीं किया गया
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने डाट काली टनल से मोहब्बेवाला के बीच सर्वे के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) को लगाया है। सीआरआरआई ने सर्वे रिपोर्ट देने के लिए प्राधिकरण से दो महीने का समय मांगा है। इसके अलावा परिवहन विभाग ने जेपीआरआई संस्था को सर्वे के लिए लगाया। बताया जा रहा है कि जेपीआरआई ने रिपोर्ट तैयार कर ली है लेकिन अभी इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सर्वे रिपोर्ट आने तक क्या कोई ऐसा इंतजाम नहीं होगा जिससे हादसों पर अंकुश लगाया जा सके। एक एजेंसी ने पुलिस पर डाली थी जिम्मेदारी एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कुछ दिन पहले बताया था कि यहां पर एक थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया गया था। ऑडिट करने वाली संस्था ने कहा था कि डिजाइन एकदम दुरुस्त है। ऐसे में हादसे रोकने के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इनमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस विभाग को दिए जाने की बात कही गई थी। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया था कि पुलिस यहां पर तैनाती बढ़ाकर प्रवर्तन तेज करे जिससे हादसे रुक सकते हैं।
नए पुराने एलाइनमेंट में अंतर
पुराना मार्ग
सड़क का ढाल-कम और चरणबद्ध
वाहन की गति नियंत्रित रहती थी करीब 20 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा
सड़क की बनावट अत्यधिक घुमावदार
पांच मोड़ जो कि प्राकृतिक गति नियंत्रक का काम करते थे।
ब्रेक ओवरहीटिंग जोखिम-बहुत कम रहता था। ब्रेक को ठंडा होने का समय मिलता था।
दुर्घटना का मुख्य कारण-संकीर्ण मार्ग
और ओवरटेकिंग की कोशिश।
नया मार्ग
सड़क का ढाल-लगातार और तेज ढलान
वाहन की गति तेज रहती है जो कि 80 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच जाती है।
सड़क की बनावट-सीधी और चौड़ी
सड़क जो कि तेज गति को बढ़ावा देती है।
ब्रेक ओवरहीटिंग जोखिम बहुत ज्यादा
दुर्घटना का मुख्य कारण-लगातार ढलान से ब्रेक फेलियर व अनियंत्रित होना।
ये भी पढ़ें...देहरादून कार हादसा: सामने था खौफनाक मंजर, तमाशबीन बनी भीड़ का नहीं पसीजा दिल, बनाते रहे वीडियो
अधिकारी भी नहीं समझ पा रहे कि क्या करें
लगातार हो रहे हादसों के बीच अब अधिकारियों की सोच भी जवाब दे गई है। कई तरह के उपाय यहां किए जा चुके हैं। बोर्ड लगाए गए हैं और जिग जैग बैरियर भी स्थापित कर दिए गए। बावजूद इसके हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे। परिवहन उपायुक्त शैलेश तिवारी ने बताया कि डिजाइन में किसी भी एजेंसी ने कोई खामी नहीं बताई है। यहां कई एजेंसियों की सिफारिशों पर एहतियाती कदम उठाए गए हैं। ऐसे में हादसे यहां क्यों हो रहे हैं इसके लिए नए सिरे से विचार किए जाने की जरूरत है। जो उपाय किए गए हैं उनसे अलग कोई और उपाय बिना बड़ी इंजीनियरिंग के संभव नहीं है।