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देहरादून मोहब्बेवाला हादसा: ढलान पर फिसल रही जिंदगी, विभाग सर्वे में अटका, 15 हादसों में छह लोग जान गंवा चुके

Thu, 05 Nov 2026 08:01 AM IST
Renu Saklani रुद्रेश कुमार, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

मोहब्बेवाला की ढलान पर हर हादसे के साथ एक नया सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इस जानलेवा रफ्तार पर लगाम कैसे लगेगी? हादसों की वजह और समाधान तलाशने के लिए कई एजेंसियां जुटी हैं, लेकिन महीनों की कवायद के बाद भी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। इस बीच सड़क पर लोगों की जान जाने का सिलसिला जारी है।
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देहरादून मोहब्बेवाला में हादसा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देहरादून मोहब्बेवाला ढलान पर ट्रकों से लगातार हादसे हो रहे हैं। इस साल अब तक 15 हादसों में छह लोग जान गंवा चुके हैं। ढलान पर अचानक रफ्तार बढ़ जाती है यह बात सब विभागों को पता है लेकिन हल किसके पास है यह कोई नहीं जानता। एनएचएआई, प्रशासन, परिवहन विभाग लगातार जांच और सर्वे का दावा कर रहे हैं लेकिन इस समस्या का अब तक कोई ठोस हल नहीं निकल सका है।

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विभाग महीनों से यहां तरह-तरह की सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों से सर्वे करा रहे हैं। किसी की रिपोर्ट मिली नहीं तो कोई रिपोर्ट के लिए दो महीने का समय मांग रहा है।दरअसल, मोहब्बेवाला का ढलान नया नहीं है मगर हादसों का सिलसिला नया है। दो साल पहले 14 नवंबर को इस तरह का पहला हादसा सामने आया था। उस वक्त भी एक कंटेनर इस ढलान पर तेज रफ्तार में आया और चेकपोस्ट के सामने वाहनों पर पलट गया। इस हादसे में एक व्यक्ति की जान चली गई। इसके बाद से यहां एक के बाद एक हादसे होते चले गए।

कभी ईंटों से भरा ट्रक पलटा तो कभी टाइल ले जाते ट्रक ने सड़क किनारे दीवार को टक्कर मार दी। कई प्रतिष्ठानों को इन हादसों में भारी नुकसान हुए। अब गत 20 सितंबर से यहां सात हादसे हो चुके हैं। इनमें पांच लोगों की मौत हो गई। ऐसा नहीं कि जिम्मेदार विभाग जागे नहीं। नींद खुली तो सड़क पर नजर आए लेकिन इसका परिणाम कुछ नहीं निकला। विभाग यहां बड़ी-बड़ी एजेंसियों से सर्वे करा रहे हैं।

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जेपीआरआई ने रिपोर्ट तैयार कर ली, सार्वजनिक नहीं किया गया
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने डाट काली टनल से मोहब्बेवाला के बीच सर्वे के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) को लगाया है। सीआरआरआई ने सर्वे रिपोर्ट देने के लिए प्राधिकरण से दो महीने का समय मांगा है। इसके अलावा परिवहन विभाग ने जेपीआरआई संस्था को सर्वे के लिए लगाया। बताया जा रहा है कि जेपीआरआई ने रिपोर्ट तैयार कर ली है लेकिन अभी इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सर्वे रिपोर्ट आने तक क्या कोई ऐसा इंतजाम नहीं होगा जिससे हादसों पर अंकुश लगाया जा सके। एक एजेंसी ने पुलिस पर डाली थी जिम्मेदारी एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कुछ दिन पहले बताया था कि यहां पर एक थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया गया था। ऑडिट करने वाली संस्था ने कहा था कि डिजाइन एकदम दुरुस्त है। ऐसे में हादसे रोकने के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इनमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस विभाग को दिए जाने की बात कही गई थी। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया था कि पुलिस यहां पर तैनाती बढ़ाकर प्रवर्तन तेज करे जिससे हादसे रुक सकते हैं।

नए पुराने एलाइनमेंट में अंतर
पुराना मार्ग
सड़क का ढाल-कम और चरणबद्ध
वाहन की गति नियंत्रित रहती थी करीब 20 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा
सड़क की बनावट अत्यधिक घुमावदार
पांच मोड़ जो कि प्राकृतिक गति नियंत्रक का काम करते थे।
ब्रेक ओवरहीटिंग जोखिम-बहुत कम रहता था। ब्रेक को ठंडा होने का समय मिलता था।
दुर्घटना का मुख्य कारण-संकीर्ण मार्ग
और ओवरटेकिंग की कोशिश।
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नया मार्ग
सड़क का ढाल-लगातार और तेज ढलान
वाहन की गति तेज रहती है जो कि 80 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच जाती है।
सड़क की बनावट-सीधी और चौड़ी
सड़क जो कि तेज गति को बढ़ावा देती है।
ब्रेक ओवरहीटिंग जोखिम बहुत ज्यादा
दुर्घटना का मुख्य कारण-लगातार ढलान से ब्रेक फेलियर व अनियंत्रित होना।

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अधिकारी भी नहीं समझ पा रहे कि क्या करें
लगातार हो रहे हादसों के बीच अब अधिकारियों की सोच भी जवाब दे गई है। कई तरह के उपाय यहां किए जा चुके हैं। बोर्ड लगाए गए हैं और जिग जैग बैरियर भी स्थापित कर दिए गए। बावजूद इसके हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे। परिवहन उपायुक्त शैलेश तिवारी ने बताया कि डिजाइन में किसी भी एजेंसी ने कोई खामी नहीं बताई है। यहां कई एजेंसियों की सिफारिशों पर एहतियाती कदम उठाए गए हैं। ऐसे में हादसे यहां क्यों हो रहे हैं इसके लिए नए सिरे से विचार किए जाने की जरूरत है। जो उपाय किए गए हैं उनसे अलग कोई और उपाय बिना बड़ी इंजीनियरिंग के संभव नहीं है।
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