एक निजी और एक सरकारी एजेंसी भी रिसर्च में जुटी
गत पांच अक्तूबर को हुए हादसे के बाद आरटीओ, लोनिवि, राजमार्ग प्राधिरण और प्रशासन ने फिर एक बार दौरा किया। यहां पर बताया गया कि एनएचएआई ने रिसर्च के लिए यहां पर सीआरआरआई को भी लगाया है। इसके साथ ही परिवहन विभाग की टीम यहां पर जेपीआरआई की टीम को लेकर पहुंची थी। अब ये दोनों टीम भी हादसों के कारणों की पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि जेपीआरआई की टीम एक दो दिनों में विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप भी सकती है।
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अब तक ये हुए उपाय
-ट्रैफिक साइन बोर्ड: क्षेत्र में गति सीमा और चेतावनी दर्शाने के लिए कुल 58 साइन बोर्ड लगाए गए हैं।
-रंबल स्ट्रिप्स: वाहनों की गति पर नियंत्रण रखने के लिए 485 मीटर क्षेत्र में रंबल स्ट्रिप्स (गति अवरोधक पट्टियां) बनाई गई हैं।
-मीडियन मार्कर: सड़क के बीच स्पष्ट विभाजन और रात में सही दिशा के लिए 1,880 मीटर मीडियन मार्कर लगाए गए हैं।
-सोलर स्टड्स: रात की दृश्यता (विजिबिलिटी) सुधारने के लिए 500 मीटर क्षेत्र में सोलर स्टड्स स्थापित किए गए हैं।