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पिता ने ठेली पर सब्जी बेचकर पढ़ाया, बेटे ने आईआईटी में दाखिला पाकर मान बढ़ाया

Thu, 29 Oct 2020 03:17 PM IST
अलका त्यागी आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • देहरादून के कैलाशपुर गांव निवासी निशांत मैनवाल ने पेश की मिसाल 
  • पांचवीं पास पिता का बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना अब होगा पूरा
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निशांत मैनवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जब मन में आगे बढ़ने की ललक हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। कुछ ऐसी ही मिसाल कायम की है देहरादून के कैलाशपुर निवासी युवा निशांत मैनवाल ने। निशांत ने अच्छी रैंक के दम पर आईआईटी रुड़की में दाखिला हासिल कर लिया है। 

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निशांत की सफलता के पीछे उनके पिता बबलू मैनवाल की बड़े संघर्ष की कहानी छुपी है। बबलू पांचवीं पास हैं। कम पढ़े लिखे होने के कारण कहीं नौकरी भी नहीं कर पाए। लिहाजा, घर का गुजारा चलाने के लिए सब्जी की ठेली लगानी शुरू की।

रोजमर्रा के संघर्षों के बीच उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर आगे बढ़ाने का सपना देखा। बेटे निशांत ने उनके सपने को साकार कर दिया। निशांत मैनवाल ने इस साल जेईई मेन और जेईई एडवांस परीक्षाएं पास की। अब वह आईआईटी रुड़की से जियोलॉजिकल टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग करेंगे।
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फॉर्म भरने की नहीं थी जानकारी
निशांत का परिवार मेहूंवाला से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित कैलाशपुर गांव में रहता है। सामान्य से परिवार के बच्चे को न तो 12वीं के बाद किसी परीक्षा के बारे में पता था और न ही उसका फॉर्म भरने की जानकारी थी। किसी तरह वह देहरादून के इंजीनियरिंग विशेषज्ञ मनु पंत के संपर्क में आए। मनु पंत ने उन्हें इंजीनियरिंग में बारे में जानकारी दी और जेईई मेन की तैयारी में मदद की। 

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जेईई एडवांस में पाई थी 2642वीं रैंक

निशांत मैनवाल ने बताया कि उन्होंने पहले तो एनटीए की जेईई मेन-1 और जेईई मेन-2 परीक्षाएं दीं। पहली परीक्षा में 90.3 और दूसरी परीक्षा में 89.9 परसेंटाइल स्कोर किया। इसके बाद उनका चयन आईआईटी दाखिलों की प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस के लिए हो गया। इसमें उन्होंने ऑल इंडिया 2642वीं रैंक(कैटेगरी) हासिल की। जिस आधार पर उन्हें आईआईटी रुड़की में सीट आवंटित हुई। इससे पूर्व निशांत ने 12वीं में 80 फीसदी अंक हासिल किए थे।

इंजीनियर बनने के बाद पिता को देंगे आराम
निशांत का कहना है कि उनके पिता ने सब्जी बेचकर जिस तरह से उन्हें पढ़ाया-लिखाया है, वह वास्तव में बड़ा संघर्ष है। जैसे ही वह इंजीनियर बन जाएंगे तो नौकरी शुरू होते ही सबसे पहले पापा का सब्जी बेचने का काम बंद कराएंगे। इसके अलावा भाई-बहन को भी पढ़ाएंगे। निशांत का छोटा भाई 12वीं की पढ़ाई कर रहा है जबकि बड़ी बहन डीएवी से बीएससी कर रही है।

लॉकडाउन में तैयारी भी की और सब्जी भी बेची
निशांत ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाएं स्थगित हो गई थीं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह तैयारी भी करते रहे और पिता के साथ सब्जी बेचने के काम में हाथ भी बंटाते रहे। निशांत के मुताबिक, जो काम आपका घर चलाए, वह छोटा नहीं होता।
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