निशांत मैनवाल ने बताया कि उन्होंने पहले तो एनटीए की जेईई मेन-1 और जेईई मेन-2 परीक्षाएं दीं। पहली परीक्षा में 90.3 और दूसरी परीक्षा में 89.9 परसेंटाइल स्कोर किया। इसके बाद उनका चयन आईआईटी दाखिलों की प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस के लिए हो गया। इसमें उन्होंने ऑल इंडिया 2642वीं रैंक(कैटेगरी) हासिल की। जिस आधार पर उन्हें आईआईटी रुड़की में सीट आवंटित हुई। इससे पूर्व निशांत ने 12वीं में 80 फीसदी अंक हासिल किए थे।
इंजीनियर बनने के बाद पिता को देंगे आराम
निशांत का कहना है कि उनके पिता ने सब्जी बेचकर जिस तरह से उन्हें पढ़ाया-लिखाया है, वह वास्तव में बड़ा संघर्ष है। जैसे ही वह इंजीनियर बन जाएंगे तो नौकरी शुरू होते ही सबसे पहले पापा का सब्जी बेचने का काम बंद कराएंगे। इसके अलावा भाई-बहन को भी पढ़ाएंगे। निशांत का छोटा भाई 12वीं की पढ़ाई कर रहा है जबकि बड़ी बहन डीएवी से बीएससी कर रही है।
लॉकडाउन में तैयारी भी की और सब्जी भी बेची
निशांत ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाएं स्थगित हो गई थीं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह तैयारी भी करते रहे और पिता के साथ सब्जी बेचने के काम में हाथ भी बंटाते रहे। निशांत के मुताबिक, जो काम आपका घर चलाए, वह छोटा नहीं होता।