दुनिया में आज से हजारों साल पहले इस विविधता में एकता की भावना को केवल भारतीय सभ्यता ने आत्मसात किया है। यह अकेले संविधान की देन नहीं है। संविधान, उन परंपराओं से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। यहां हर कोई आजाद है, हम लोकतंत्र में हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कह कि मैं ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करता हूं कि मैं इस देश में पैदा हुआ हूं। यहां विविधता हमारी नस-नस में है। चूंकि नसों में हैं, इसलिए हम उस विविधता से एकता पैदा करते हैं। हम हिंदुस्तानी इस विविधता का आनंद लेते हैं। भाषा, रस्मोरिवाज और ईष्ट देव भले ही अलग हों लेकिन हमारी एकता ही हमारी पहचान है।
उन्होंने कहा कि आज छठ पर्व दिल्ली और उत्तराखंड में मनाया जाता है, इससे अच्छा उदाहरण और क्या होगा। हमारे तरीके भले अलग-अलग हैं लेकिन पहाड़ पर कहीं से भी चढ़ो, चोटी पर ही पहुंचोगे।
उन्होंने यह भी कहा कि हमारे भीतर वह क्षमता है कि हम दुनिया को एक नई राह दिखा सकते हैं। हमारी सभ्यता और संस्कृति नई नहीं है बल्कि यह वक्त के साथ परखी हुई सभ्यता है। इसके पीछे वजह यह है कि हम एकरूपता लाना नहीं चाहते।