श्री झंडे साहिब, संगतों की अटूट आस्था के प्रतीक हैं। आरोहण के दौरान लाखों संगतों ने इस दिव्य शक्ति के दर्शन किए। श्री झंडेजी के स्नान के समय बारिश हुई तो मानो साक्षात इंद्रदेव प्रकट हो गए हों। दोपहर में आरोहण शुरू होने लगा तो दिनभर बादलों में छिपा सूरज कुछ देर के लिए नजर आया। इस अद्भुत नजारे के बीच झंडेजी के जमकर जयकारे लगे।
सुबह आठ बजे से श्री झंडेजी को उतारना शुरू हुआ था। उसके बाद संगतों ने पंचगव्य से इनका स्नान कराना शुरू किया। स्नान शुरू होते ही बारिश शुरू हो गई। बीच-बीच में हो रही बूंदाबांदी के बीच श्री झंडेजी को स्नान कराया जाता रहा। दोपहर करीब 2.30 बजे 10 से 12 मिनट तक सूरज भी नजर आया। इस दौरान सूरज की किरणें श्री झंडेजी पर पड़ी।