खक गांव साहित्य, संस्कृति, कला और प्रकृति के माध्यम से दुनिया के सृजनशील लोगों को एक मंच पर लाने का अभियान है। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, वसुधैव कुटुंबकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना है।
जिले के थानो स्थित देश के पहले लेखक गांव में 25 से 29 अक्तूबर तक अंतरराष्ट्रीय महोत्सव आयोजित होगा। इसमें 60 देशों के हिंदी भाषी प्रतिनिधि और विद्यार्थी शामिल होंगे। पांच दिवसीय महोत्सव के 32 सत्रों में साहित्य, संस्कृति, कला, शिक्षा और नारी सशक्तीकरण समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी।
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शुक्रवार को रिस्पना स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि साहित्य मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने, जागृत करने और उनका संरक्षण करने का काम करता है। संवेदनाएं समाप्त होने पर मनुष्य अपनी मानवीय पहचान खोकर पत्थर के समान हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि लेखक गांव साहित्य, संस्कृति, कला और प्रकृति के माध्यम से दुनिया के सृजनशील लोगों को एक मंच पर लाने का अभियान है। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, वसुधैव कुटुंबकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना है। यह मंच विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। डॉ. निशंक ने कहा कि संस्कृति के माध्यम से संस्कारों को जीवित रखा जा सकता है। जड़ों से जुड़ाव व्यक्ति की परिवार, समाज और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखता है।
भारतीय सांस्कृतिक परंपरा विश्व के लिए प्रेरणा है और साहित्य इसके संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से दूरी विकृतियों को जन्म देती है। संस्कृति सृजन का आधार और विकृति विनाश का कारण है। सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति के निकट रहना जरूरी है। हिमालय की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत प्रकृति, संस्कार, संस्कृति और साहस की प्रेरणा देती है। लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने महोत्सव की जानकारी दी। इस मौके पर पद्मश्री डॉ. आरके जैन, डॉ. सविता मोहन और वीएम उपाध्याय मौजूद रहे।