माननीयों ने आशियाना बनाया तो वीवीआईपी हो गई कॉलोनी
वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद मंत्रियों के लिए आवास की समस्या सामने आई तो यमुना कॉलोनी का नाम सबसे पहले आया। इसके बाद यहां तमाम पुराने भवनों को नया रंग-रूप देकर इन्हें उत्तराखंड सरकार के मंत्रियों को आवंटित किया गया। तब से यमुना कॉलोनी को वीवीआईपी का रुतबा भी मिल गया।
इसलिए की गई थी यमुना कॉलोनी की स्थापना
अविभाजित उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना घाटी के टिहरी बांध, लखवाड़, व्यासी, किशाऊ, मनेली भाली, विष्णुप्रयाग, चीला जैसी महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाओं के सर्वेक्षण एवं नियोजन के लिए यहां मुख्य अभियंता, मंडलीय एवं खंड कार्यालय स्थापित किए गए थे। इसके अलावा तत्कालीन उत्तर प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (वर्तमान में उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड) के कार्यालय और आवास भी यहां स्थापित किए गए थे।
देहरादून स्थित यमुना कॉलोनी जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है। हम चाहते हैं कि यूपी की तर्ज पर यहां भी पुरानी बिल्डिंग को ध्वस्त कर नई मल्टीस्टोरी बिल्डिंग का निर्माण करें। इसमें आवास के साथ कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी स्थापित किए जा सकेंगे।
- सतपाल महाराज, सिंचाई मंत्री, उत्तराखंड सरकार