काउंसिल ऑफ सांइटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) ने ‘अर्थ साइंसेज रिसर्च’ पर सबसे बेहतर प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने पर दून के डॉ. अरुण जोशी को पहले स्थान पर चुना है। जबकि इसके लिए देशभर से 1000 साइंटिस्ट पहुंचे थे। अब वह सीएसआईआर की फंडिंग से कोयला बनने वाली पुरानी वनस्पतियों पर खोज करेंगे। पहली बार सीएसआईआर ने यूनिवर्सिटी को छोड़कर एक कॉलेज को इस शोध के लिए चुना है।
डॉ. अरुण जोशी ने वनस्पतियों पर पीएचडी की है। सीएसआईआर ने देशभर के यंग साइंटिस्ट से ‘अर्थ साइंसेज रिसर्च’ के लिए प्रोजेक्ट मांगे थे। देशभर से इसमें 1000 प्रोजेक्ट आए। इनमें से शीर्ष 10 का चयन किया गया। इसके बाद आठ वैज्ञानिकों की टीम ने इन दस यंग साइंटिस्ट को इंटरव्यू के लिए बुलाया। इंटरव्यू, शोध की ललक और समझ को देखने के बाद छह साइंटिस्ट को अर्थ साइंसेज के प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है।
इसमें एसजीआरआर पीजी कॉलेज के डॉ. अरुण जोशी के अलावा सीएसआईआर धनबाद के डॉ. मुकेशर कुमार महतो, जेएनयू की डॉ. उमा पांडेय, सीएसआईआर एनजीआरआई हैदराबाद के डॉ. तवहीद खान, सीएसआईआर एनआईओ गोवा की डॉ. जयंती चैटर्जी और जेएनयू दिल्ली के डॉ. श्याम रंजन के नाम शामिल हैं। सीएसआईआर से डॉ. अरुण को 60 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड और रिसर्च इक्विपमेंट्स खरीदने के लिए पैसा मिलेगा।
कॉलेज का नाम सुनकर चौंके
डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि जब उनसे सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने संस्थान का नाम पूछा तो उन्होंने एसजीआरआर पीजी कॉलेज बताया। वह यूनिवर्सिटी के बजाय कॉलेज का नाम सुनकर चौंक गए। बाद में जब उन्हें कॉलेज के यूजीसी के 32 कॉलेजों में शामिल होने, नैक ए ग्रेड आदि की जानकारी दी तो वह संतुष्ट हुए।