डॉग शो में प्रतिभाग करने और जीतने वाले डॉगी के पपी की कीमत सामान्य पपी से कई गुना अधिक होती है। विशेषकर किसी भी श्रेणी में जीतने वाले डॉगी के पपी की कीमतों में इजाफा हो जाता है।
सहारनपुर के विकास गुप्ता ने बताया कि ठीक स्तर का डॉग शो जीतने वाले डॉगी के पपी की कीमत में 50 हजार से एक लाख रुपये तक का इजाफा हो जाता है। डॉग ब्रीडिंग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार किसी भी नस्ल के पपी की कोई कीमत तय नहीं है।
अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों की डॉगी की पसंद भी अलग है। महिलाओं और बच्चों को जहां पग, चिवावा, शिह्टजू, मिनिएचर फिंश्चर, पमेरियन, बीगल जैसी नस्लों के डॉगी पसंद आते हैं, वहीं युवाओं को जर्मन शेफर्ड, रोट वायलर, बॉक्सर, ग्रेट डेन, शेंट बनार्ड, बुल मेस्टिफ, अकीता, साइबेरियन हस्की, अफगान हाउंड जैसी नस्लें ज्यादा लुभाती हैं। आमतौर पर परिवार के साथ या घर की सुरक्षा के लिए लोग लेब्राडोर, जर्मन शेफर्ड, तिब्बतियन मेस्टिफ, पमेरियन जैसी मिली-जुली नस्लों को ही पसंद करते हैं।
पंजीकरण कराना अनिवार्य
डॉग ब्रीडिंग से पहले कई जगह पंजीकरण करवाना अनिवार्य होता है। नगर निगम में पंजीकरण करवाना होता है। डॉग शो के हिसाब की ब्रीडिंग के लिए कैनल क्लब ऑफ इंडिया में भी पंजीकरण करवाना होता है। वहीं, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया में भी पंजीकरण करवाना आवश्यक होता है।