देहरादून स्थित राजपुर रोड पर जिलाधिकारी का आवास गायब हो गया है, ऐसा सच में नहीं बल्कि नगर नियोजन विभाग के जोनल प्लान में है।
मास्टर प्लान के आधार पर तैयार किए गए जोनल प्लान में न केवल जिलाधिकारी आवास गायब है बल्कि तमाम अन्य स्तर की गड़बड़ियां भी सामने आई है। कहीं आवासीय इलाके को शैक्षणिक दर्शाया गया है तो कहीं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सरकारी दिखाया गया है। हालांकि अभी लोग आपत्ति दर्ज कराकर खामियां दुरुस्त करवा सकते हैं।
मास्टर प्लान के मुताबिक तैयार किए गए जोनल प्लान के ड्राफ्ट में कई तरह की खामियां सामने आ रही है। प्लान के अनुसार कई लोगों के घरों और भूमि को गायब कर वहां स्कूल की सीमा दर्शायी गई है। ऐसा ही मुख्य डाकघर के आसपास के इलाकों में भी हुआ है।
यहां प्राइवेट और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी को सरकारी और अर्द्ध सरकारी दर्शाया गया है। कालीदास रोड पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग(आईआईआरएस) के अंदर से भी सड़क दिखाई गई है। यह सड़क दूसरी ओर नाले तक जाती हुई दिखाई गई है। लैंड यूज गलत दर्शाए जाने की दशा में उस क्षेत्र में लोगों के नक्शे पास नहीं हो सकेंगे, जिससे उन्हें दिक्कत झेलनी पड़ेगी।
जानबूझकर किया खेल!
सूत्रों की मानें तो कई बार ऐसी खामियां जानबूझकर छोड़ दी जाती है। एक बार ड्राफ्ट फाइनल हो जाए फिर लोग लैंड यूज चेंज करवाने के लिए चक्कर काटते हैं। मजबूरी में वह अधिकारियों और कर्मचारियों के हाथों में खेलते हैं। फिर उनसे रकम ऐंठकर उनका काम कर दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जोनल प्लान में हुई खामियां मानवीय चूक हैं या जानबूझकर की गई हैं?
पुरानी खामियां नहीं सुधारी
जोनल प्लान के पहले ड्राफ्ट में कई गलतियां थीं। जिस पर अलग-अलग लोगों और संगठनों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई। इसमें से अधिकांश खामियां अब भी जस की तस बनी हुई है। ऐसा लगता है कि नगर नियोजन विभाग ने लोगों के सुझावों और आपत्तियों को देखना तक जरूरी नहीं समझा।
चकराता व राजपुर रोड क्षेत्र की खामियां
- नारी शिल्प स्कूल की बाउंड्रीवाल एसजीएनपी ब्वॉयज इंटर कॉलेज की बाउंड्रीवाल तक दिखाई गई है। जबकि इस बीच में कई मकान और प्लॉट है। जोनल प्लान के अनुसार यह सभी एजुकेशनल लैंड यूज में आ गए हैं। ऐसे में इन लोगों का नक्शा पास नहीं हो सकेगा।
- चिल्ड्रन (मॉर्डन) एकेडमी की बाउंड्रीवाल भी उत्तर में वर्कशॉप तक दिखाई गई है जबकि यहां कई प्राइवेट प्रॉपर्टी हैं। उन्हें भी इसी तरह की दिक्कत होगी।
- एसजीएनपी स्कूल के पास की गलियों को स्कूल की बाउंड्रीवाल के अंदर दिखाया गया है।
- घंटाघर के पास मुख्य डाकघर से लगी प्राइवेट प्रापर्टी को सरकारी व अर्द्ध सरकारी बताया गया है।
- नेशविला रोड को बिजली ट्रांसफार्मर के बजाय करीब दो सौ मीटर आगे से मोड़ा गया है। सड़क की चौड़ाई प्लान में 18 मीटर है। जबकि वहां वास्तविकता में आठ से दस फुट की सड़क है।
- राजपुर रोड पर कॉमर्शियल कांप्लेक्स को प्राइमरी स्कूल की भूमि पर दर्शाया गया है।
- सीएनआई चर्च की भूमि पर आवास दर्शाए गए हैं। प्लान से चर्च गायब है।
- जिलाधिकारी आवास और आसपास की सरकारी भूमि को प्राइवेट रेजीडेंशियल दर्शाया गया है। जिलाधिकारी आवास के बीचों-बीच एक सड़क दिखाई गई है, जो राजपुर रोड से दून बाइबिल कॉलेज को जोड़ रही है।
- कालीदास रोड पर आईआईआरएस के अंदर से सड़क दर्शाई गई है, जो दूसरी ओर नाले तक जा रही है।
जोनल प्लान में कई तरह की खामियां हैं। ऐसा लगता है कि धरातल पर जाकर प्लान तैयार करना तो दूर विभाग ने गूगल अर्थ तक का सहारा नहीं लिया। विभाग को खामियों में सुधार करना चाहिए, ताकि लोगों को दिक्कत न हो।
- डीएस राणा, अध्यक्ष, आर्किटेक्ट-ड्राफ्ट्समैन वेलफेयर एसोसिएशन