इस दौरान फोन पे के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन कर 1375 रुपये जमा कराए गए, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से अनिष्व बर्धन को कोई भी जानकारी नहीं दी गई। जब इस संबंध में परिवहन कार्यालय से संपर्क किया गया तो अधिकारियों ने बताया कि इस नाम से कोई आवेदन नहीं आया है और न ही फीस जमा की गई है।
मामले में आरटीओ डीसी पठोई का कहना है कि ऐसा लगता है कि जालसाजों द्वारा फर्जी वेबसाइट तैयार कर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए फीस जमा कराई जा रही है जो बेहद गंभीर विषय है। कहा कि एआरटीओ (प्रशासन) द्वारिका प्रसाद को प्रकरण की विभागीय स्तर पर जांच करने के साथ ही जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब परिवहन विभाग में जालसाजी का मामला सामने आया है। चार माह पूर्व परिवहन विभाग में गाड़ियों के फर्जी इंश्योरेंस का मामला भी सामने आया था। उक्त प्रकरण में भी जांच कराई गई थी।