जांच में खाताधारक राकेश रोशन पर आरोप है कि उसने आर्थिक लाभ और कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग सुविधाएं साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराईं। पुलिस के अनुसार, इन संसाधनों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के संग्रहण, छिपाने और वितरण के लिए किया गया।
मामले में राकेश रोशन के अलावा कृष अरोड़ा और अनुराग को भी आरोपी बनाया गया है।
तीनों देहरादून के रहने वाले हैं। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि तीनों आरोपी एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर ठगों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में फर्जी केवाईसी दस्तावेजों, फर्जी फर्मों, विभिन्न मोबाइल नंबरों, ई-मेल आईडी और इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स के उपयोग के संकेत भी मिले हैं। इसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।