युवाओं के कार्यों को उजागर करना है पुरस्कार का उद्देश्य
प्रो. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार का उद्देश्य युवाओं की ओर से किए जा रहे सामाजिक उद्यमों के कार्य को उजागर करना, उन्हें प्रोत्साहित करना, सामाजिक उद्यमशीलता के प्रति युवाओं में कृतज्ञता भाव विकसित करना और युवा भारतीयों को सेवा कार्य के लिए प्रेरित करना है। यह पुरस्कार वर्ष 1991 से प्राध्यापक यशवंतराव केलकर की स्मृति में दिया जा रहा है, जिन्हें परिषद के शिल्पकार के रूप में जाना जाता है।
संकट के समय संगठन के कार्यकर्ता रहते हैं आगे
सीएम धामी ने कहा, देश में जब भी कोई संकट आया आपातकाल में लोकतंत्र पर हमला, शिक्षा सुधार के संघर्ष, सीमाओं पर संकट, छात्र आंदोलनों की व्यवस्थाएं, हर जगह परिषद के कार्यकर्ता अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। हजारों कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए यातनाएं सहीं, पर लोकतांत्रिक ज्योति बुझने नहीं दी। आज वहां भारत माता की जय के नारे जिस शक्ति और उत्साह से गूंजते हैं, वह परिषद की दशकों की सतत तपस्या का परिणाम है। कहा, भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति यदि सही दिशा में प्रयुक्त हो जाए, तो भारत न केवल आर्थिक महाशक्ति बनेगा, बल्कि फिर से विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा। मुझे विश्वास है कि इस अधिवेशन से निकली ऊर्जा, विचार और संकल्प राष्ट्र निर्माण में नए अध्याय रचेंगे।
देश भर के युवाओं में जोश भर गए पांडेय
श्रीकृष्ण पांडेय आजाद अपने अनोखे अंदाज में देश भर के युवाओं में राष्ट्र प्रथम के लिए जोश भर गए। उन्होंने कहा, संगठन की ओर से पुरस्कार के रूप में दी गई एक लाख रुपये की निधि भारतीय मनोरोगियों की सेवा के लिए समर्पित करता हूं। कहा, सेवा के मार्ग में बाधाएं तो आती ही हैं, लेकिन उनसे घबराना नहीं चाहिए। भगवान राम के मंदिर के निर्माण में 500 वर्षों का लंबा संघर्ष लगा, लेकिन जब मंदिर बना, तो पूरी दुनिया भारत की ओर देखने लगी। जब हमारे प्रभु हमारे लिए इतने संघर्षों के बाद बाहर आ सकते हैं, तो हम क्यों नहीं, इसलिए सेवा के मार्ग से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।