छह भ अपनाने पर जोर, भारतीयता न हो कमजोर
कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा की अखिल भारतीय संगठन मंत्री डाॅ. वृषाली जोशी ने उपस्थित लोगों से छह भ अपनाने पर जोर दिया। यह छ भ हैं-भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भ्रमण और भवन। उन्होंने कहा कि यह सब भारतीय होने चाहिए। विश्वमांगल्या सभा वर्ष 2016 में अस्तित्व में आई है। इसका उद्देश्य बदलते आधुनिक दौर की चुनौतियों के बीच माताओं को भारतीय सनातन संस्कृति के अनुरूप तैयार करना, ताकि वह समाज के व्यापक हित में अपने परिवार को तैयार कर सकें। संगठन का कार्य अभी 35 प्रांतों में चल रहा है। सभा ने 25 प्रांतों में मातृ संस्कार समागम की शृंखला शुरू की है। इस क्रम में अभी देहरादून से पहले उज्जैन और अयोध्या में मातृ संस्कार समागम आयोजित हो चुका है।
कार्यक्रम में गीता धामी ने कहा कि सामाजिक सेवा ही मानवीय जीवन का मूल है और जब सेवा किसी परिवार की परंपरा बन जाती है तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह पूरे समाज की चेतना को जागृत करता है। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पत्नी और विकास फाउंडेशन की अध्यक्ष मृदुला धर्मेंद्र प्रधान ने संस्कारों पर जोर देते हुए हिमाचल-उड़ीसा के अपने अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि वह हिमाचल की रहने वाली हैं, लेकिन शादी उड़ीसा में हुईं। घर परिवार के ऐसे संस्कार थे कि एडजस्ट करने में कोई दिक्कत नहीं हुई।
गीता धामी के नेतृत्व में तैयार होगा संगठन
विश्वमांगल्य सभा के इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में तय किया गया कि राज्य में गीता धामी के नेतृत्व में संगठन को खड़ा किया जाएगा। कार्य पद्धति से संबंधित सत्र में जनप्रतिनिधि परिवार संपर्क विभाग की अखिल भारतीय संयोजक डाॅ. अनुराधा यादव ने यह जानकारी दी। उन्होंने अपने संबोधन में संगठन की कार्य पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि उत्तराखंड में गीता धामी के नेतृत्व में जिलों में टीमें बनाई जाएंगी।