आखिरकार 11 दिन तक चली सफाई कर्मचारियों की हड़ताल बृहस्पतिवार देर रात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ वार्ता के बाद समाप्त हो गई। अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ समेत अन्य कर्मचारी संगठनों के साथ हुई बातचीत में तय हुआ कि स्वच्छता समितियों से जुड़े कर्मचारियों को प्रतिमाह 5000 रुपये मानदेय की जगह प्रतिदिन 275 रुपये का भुगतान किया जाएगा।
सफाई कर्मचारियों को प्रतिदिन 285 रुपये का भुगतान करने समेत अन्य मांगों को लेकर नगर निगम के 1800 से अधिक कर्मचारी बीती सात मई से हड़ताल पर थे। नगर निगम के अलावा जिला प्रशासन के स्तर पर हड़ताल समाप्त कराने के तमाम प्रयास किए गए, मगर वे नाकाफी साबित हुए। बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ समेत तमाम कर्मचारी संगठनों को सीएम ने बातचीत के लिए बुलाया। कर्मचारियों ने प्रतिदिन 275 रुपये का भुगतान देने के साथ ही निकाले गए कर्मचारियों को दो से तीन दिन के भीतर दोबारा रखने की मांग की, जिस पर सहमति बन गई।
वहीं, बताया गया है कि नियमितीकरण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री ने कर्मचारी नेताओं से कानूनी पेंच होने की बात कही है, इसके चलते इस मुद्दे पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। इसके बाद अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार ने मौके पर ही हड़ताल वापसी का एलान कर दिया। मुख्यमंत्री से वार्ता के दौरान विधायक मुुन्ना सिंह चौहान, भगवत प्रसाद मक वाना, सुनील उनियाल गामा समेत कई लोग मौजूद रहे।
आज सुबह से करेंगे काम
समझौता वार्ता के बाद कर्मचारी नेताओं ने बताया कि शुक्रवार सुबह से सभी सफाई कर्मचारी काम शुरू कर देंगे। 1800 से अधिक कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से राजधानी में सफाई व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई थी। सड़कों से लेकर गलियों तक में कूड़े के ढेर लग गए थे। हड़ताल समाप्त होने से सरकार से लेकर अफसरों तक ने राहत की सांस ली।
आक्रोशित सफाईकर्मियों ने अफसरों को बनाया बंधक
संविदा पद पर समायोजन की मांग को लेकर आंदोलित मोहल्ला समिति के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 11वें दिन भी जारी रही। आंदोलित कर्मचारियों ने दिनभर नगर निगम में जमकर हंगामा किया और नगर आयुक्त समेत तमाम अफसरों को बंधक बना लिया। उधर सफाईकर्मियों पूरे शहर में घूम घूमकर एकत्र किए गए कूड़े को सड़कों पर फैला दिया। यह सब कुछ अफसरों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी मेें हुआ, सब तमाशबीन बनकर नजारा देखते रहे। कर्मचारियाें की हड़ताल खत्म कराने के लिए नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे ने कर्मचारी संगठनों के नेताओं के साथ समझौता वार्ता भी की लेकिन शाम तक आंदोलित कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद देर रात मुख्यमंत्री से हुई वार्ता के बाद मामले का पटाक्षेप हो गया।
दिन में नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे, एडीएम अरविंद पांडे, वाल्मीकि समाज के पूर्व अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना, एसपी सिटी प्रदीप कुमार राय, भाजपा नेता सुनील उनियाल गामा और कर्मचारी नेता राजेश कुमार, धीरज भारती व मोहल्ला स्वच्छता समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार की मौजूदगी में हुई बैठक में आंदोलित कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं बन पाई। नगर आयुक्त ने हड़ताली कर्मचारियों से एक हफ्ते का समय मांगते हुए शासन से वार्ता कराने की बात कही लेकिन कर्मचारियों ने लिखित में मांगा तो नगर आयुक्त ने इनकार कर दिया। जिससे वार्ता विफल हो गई। वार्ता विफल होने के बाद कर्मचारियों ने नगर निगम में जमकर हंगामा किया। अफसरों के खिलाफ नारेबाजी भी की।
गाड़ियां छोड़ पिछले दरवाजे से निकले अफसर
नगर निगम में कर्मचारियों के हंगामे व मारपीट की आशंका से कई अफसर अपनी गाड़ी निगम में छोड़कर पिछले दरवाजे से निकल गए। इसका पता चलते ही आंदोलित कर्मचारियों ने अफसरों की गाड़ियों में पंचर कर दिया। नगर निगम में रात में मौजूद हड़ताली कर्मचारियों को किसी ने सूचना दी कि तहसील में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में कूड़ा उठाया जा रहा है। इस पर हंगामा कर रहे कर्मचारी भागकर तहसील पहुंचे, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही गाड़ी में कूड़ा भेजा जा चुका था।
शहर में दर्जनों इलाकों में फैलाया कूड़ा
प्रशासन और अन्य संगठनों ने सफाई कर जो कूड़ा इकट्ठा किया था, उसे हड़ताली कर्मचारियों ने शहर में फैला दिया। कर्मचारियों ने सुभाष रोड, तहसील चौक डिस्पेंसरी रोड, चकराता रोड, पलटन बाजार, कलेक्ट्रेट, बल्लीवाला, बल्लूपुर, कांवली रोड, सहारनपुर चौक, लालपुल, निरंजनपुर समेत शहर के कई इलाकों में कूड़ा फैला दिया, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ गई।