ये सवाल उठे
- स्कूल में सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।
- क्या स्कूल में पर्याप्त प्रशिक्षित लाइफ गार्ड्स और सुरक्षा कर्मी मौजूद थे।
- क्या स्कूल में बच्चे को समय पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की ओर से सीपीआर दिया गया।
- मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद 15 मार्च को स्कूल क्यों खुला।
- अस्पताल में बच्चे को समय पर उचित उपचार मिल पाया।
पूर्व की घटनाओं से सबक नहीं लिया : डॉ. खन्ना
पहले भी पाया गया है कि स्कूलों में बच्चों के प्राथमिक उपचार के जो उपकरण और साधन होने चाहिए, उनका समुचित इंतजाम नहीं होता। यह घटना पिछले साल हल्द्वानी के एक स्कूल के छात्र की बरेली के एक पार्क में डूबने से हुई मौत की याद दिलाती है। उस घटना के बाद आयोग ने शिक्षा और पर्यटन विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि सभी एडवेंचर स्पोर्ट्स पार्क और स्कूलों में कम से कम 30% कर्मचारियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में वे तत्काल उपचार प्रदान कर सकें। जिस स्कूल में बच्चे की मौत हुई, उसमें निर्देशों का पालन किया गया या नहीं, यह जांच का विषय है।
-डॉ. गीता खन्ना, अध्यक्ष, उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग