उन्हाेंने बताया कि टाटा कैपिटल फाइनेंस सर्विसेस को जमीन गिरवी रखकर उन्होंने कोई ऋण नहीं लिया। आरोप लगाया कि लोन एग्रीमेंट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर हैं। साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज के आधार पर यह फर्जीवाड़ा किया गया है। इस मामले में दून के एसएसपी से भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी।
कार्रवाई न होने की स्थिति में पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। एसओ राजपुर अशोक राठौड़ ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर दंपति की तरफ से फाइनेंस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ कुशाल राय, राजीव सब्बरवाल, एफ एन सूबेदार, मुकुंद एस धर्माधिकारी, अनुराधा ई ठाकुर, एमडी माल्या, सुशांत शर्मा, राजीव भदौरिया के खिलाफ दस्तावेजों में हेराफेरी, जालसाजी आदि धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है।