बता दें कि मनमोहन कंडवाल और अनिल शर्मा उर्फ चीनी की जोड़ी में दो साल पहले दरार आ गई थी। वर्ष 2023 में लगातार छह बार के अध्यक्ष रहे मनमोहन कंडवाल चुनाव नहीं लड़े थे। इसका सीधा फायदा उनके जोड़ीदार रहे और 2022 तक सचिव रहे अनिल शर्मा उर्फ चीनी को मिला। इससे उन्होंने रिकॉर्ड जीत हासिल की। समीकरण पिछले साल बिल्कुल अलग हो गए। पिछले साल अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल एक साल के अंतराल के बाद एक बार फिर अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतर गए।
इसका परिणाम ये हुआ कि कंडवाल के खेमे के मत उनके पाले में ही रहे। इसका खामियाजा अधिवक्ता अनिल शर्मा को उठाना पड़ा और अब कई सालों से किस्मत आजमा रहे राजीव शर्मा उर्फ बंटू के हाथ प्रदेश की सबसे बड़ी बार एसोसिएशन की कमान आ गई। एक साल से कई छोटे-बड़े फैसले लेकर बंटू ने अधिवक्ताओं के हितों की राजनीति की, लेकिन वह अपनी इन कोशिशों में कितने कामयाब रहे हैं इसका पता 25 फरवरी को ही लग पाएगा। इस बार भी वह अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। देखने वाली बात यह भी होगी कि लगातार दो सालों से सचिव चले आ रहे राजवीर सिंह बिष्ट इस बार भी सचिव पद के लिए चुनाव लड़ते हैं या नहीं।