स्कूल में बच्चों ने उत्पीड़न की बात से इनकार किया है। एकाध चोटिल बच्चे से बात हुई तो उसने दुर्घटना में चोटिल होना बताया है। सभी बच्चों ने पुलिस को लिखित भी दिया है। पुलिस अभी इस बात की जांच पड़ताल कर ही रही कि पता चला कि वहां से 27 अक्तूबर को पांच बच्चे (15 से 16 वर्ष आयु) दीवार फांदकर भाग गए हैं। मामले की जानकारी लगते ही वहां पर बाल आयोग की टीम भी पहुंच गई।
एसपी सिटी ने बताया कि इनमें दो बच्चे नेपाल में अपने घर पहुंच गए हैं। जबकि, तीन बच्चों को बनबसा कोतवाली में बैठाया गया है। इनके पास स्कूल प्रबंधन की एक टीम को भेजा जा रहा है। वहां जाकर टीम ही फैसला करेगी कि उन्हें घर भेजा जाना है या फिर वापस लाना है।
इधर, इस मामले में स्कूल प्रबंधन से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने बात नहीं की। शुरूआत में स्कूल के महासचिव ने फोन उठाया लेकिन थोड़ी देर बाद बात करने को कहा। लेकिन, इसके बाद रात तक उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई। उनका पक्ष मिलते ही प्रकाशित किया जाएगा।
दरअसल, लॉकडाउन के बाद से कोई भी बच्चा अपने घर नहीं जा सका। बताया जा रहा है कि लगातार बच्चे अपने घर जाने की मांग कर रहे थे। इस बीच उन्होंने कई बार प्रबंधन से इस बारे में शिकायत भी की।
चूंकि, लॉकडाउन में उनके घर से कोई नहीं आ सकता था तो प्रबंधन ने उन्हें घर नहीं जाने दिया। इस बीच कुछ बच्चों ने कहा कि उनके घरवाले नेपाल बॉर्डर तक आ गए हैं, लिहाजा उन्हें वहां तक छोड़ दिया जाए। लेकिन, प्रबंधन यह रिस्क उठाने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस पूरे मामले की अब जांच की जा रही है।
शिकायत आई तो कानूनी कार्रवाई करेगी पुलिस
इस मामले में अभी तक किसी की ओर से शिकायत पुलिस को नहीं मिली है। एसपी सिटी श्वेता चौबे ने बताया कि उन्हें स्कूल प्रबंधन ने न तो बच्चों के गायब होने की शिकायत की है और न ही परिजनों ने बच्चों के चोटिल होने या उत्पीड़न की।
सभी बच्चों ने पुलिस को लिखित रूप से दिया है कि वे उत्पीड़न के कारण नहीं बल्कि छुट्टी न मिलने के कारण घर जाना चाहते थे। अभी तक उत्पीड़न के बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। उन्होंने बताया कि यदि पुलिस को कोई शिकायत मिलती है तो कानूनी कार्रवाई अवश्य की जाएगी।