टिहरी और चमोली जिला सहकारी बैंकों में 16 करोड़ 50 लाख रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है।
टिहरी जिला बैंक की दो शाखाओं में फर्जीवाड़ा करके करीब ढाई करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए गए। इतना ही नहीं एक बैंक शाखा ने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर 91 लाख रुपये का ऋण मनमर्जी से बांट दिया। अब इस राशि को वसूलने में बैंक प्रबंधन के पसीने छूट रहे हैं। इतना ही नहीं नियम-कायदों को ताक पर रखकर महंगी दरों पर सामान खरीद करके बैंकों को चूना लगाया गया। सहकारी बैंकों में ये गड़बड़झाले का खुलासा वित्त विभाग के विशेष ऑडिट में हुआ है। शासन ने वित्त विभाग को सहकारी बैंकों के पिछले पांच साल का विशेष ऑडिट कराने का निर्देश दिया था।
काल्पिनक एंट्री करके ठिकाने लगा दिए 1.42 करोड़
ऑडिट में टिहरी जिला सहकारी बैंक की बढ़ियारगढ़ शाखा में एक करोड़ 42 लाख 21 हजार रुपये का गबन पकड़ा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ये मामला 17 जुलाई 2014 से 14 अगस्त 2014 की अवधि का है। ऑडिट जांच में पाया गया कि बगैर कोई वाउचर बनाए आईसीआईसीआई बैंक में 15 लाख रुपये जमा दिखाए गए, जबकि हकीकत में बैंक में ऐसा कोई खाता ही नहीं था। इतना नहीं पूरण सिंह रौथाण के खातों में काल्पनिक एंट्री दिखाकर शाखा का पैसा ठिकाने लगा दिया गया।
खाता खुला नहीं, हड़प लिए 1.11 करोड़
सहकारी बैंक की नई टिहरी शाखा के दस्तावेजों में यह दिखाया गया कि एचडीएफसी बैंक खाते में एक करोड़ 11 लाख आठ हजार रुपये जमा किए गए। लेकिन वास्तव में एचडीएफएसी में कोई खाता ही नहीं था। इतना नहीं अभिलेख में ये धनराशि ऐसे खाताधारक को भुगतान की गई दर्शाई, जिसका बैंक में खाता ही नहीं था।
क्षेत्राधिकार से बाहर बांट दिए लाखों के ऋण
ऑडिट में यह खुलासा भी हुआ है कि जिला सहकारी बैंक ने घर बनाने के लिए लाखों रुपये का ऋण अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर बांट दिए। करीब 91 लाख रुपये के बांटे गए इन ऋणों की वसूली का तकाजा नहीं किया गया। अब बैंक प्रबंधन को इसकी वसूली में पसीने छूट रहे हैं।
चमोली जिला सहकारी बैंक को यूं लगा चूना
-बैंक कर्मचारियों को बिना ब्याज के एडवांस बांटने से लाखों का चूना
-अंशधारकों को 88.36 लाख रुपये का अनियमितत लाभांश बांट दिया
-ई निविदा नहीं की, मंहगी दरों पर खरीदा सामान, 2.80 करोड़ का चूना
रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई। जो भी अनियमितताएं उजागर हुई हैं, उन्हें गंभीरता से लेते हुए दोषियो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता होगी तो उनसे रिकवरी की जाएगी। जहां मामले बेहद गंभीर और गबन के होंगे, वहां एफआईआर दर्ज की जाएगी।
-बीएम मिश्र, अपर सचिव(सहकारिता) एवं प्रशासक, राज्य सहकारी बैंक