रुड़की के रामपुर में दो दिन से चल रहा दीनी इज्तमा शांति सद्भाव और भाईचारे के पैगाम के साथ संपन्न हो गया।
बुराइयां त्यागकर अच्छाइयां अपनाने का संकल्प
आयोजन में जुटे लाखों अकीदतमंदों ने बुराइयां त्यागकर अच्छाइयां अपनाने का संकल्प लिया। विशेष दुआ में लाखों हाथ एक साथ उठे। इज्तमा के दूसरे और अंतिम दिन दूर-दूर से आए अकीदतमंदों को संबोधित करते हुए डॉ. अय्यूब ने कहा कि नफरत को केवल भाईचारा कायम करके ही खत्म किया जा सकता है।
इसके लिए दीन का रास्ता सबसे आसान है, जो अमन, शांति और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इंसान मिट्टी के पुतले के सामान है। इसे मिट्टी में ही मिल जाना है, इसलिए जिंदगी को दूसरों का भला करने तथा अल्लाह की इबादत में लगाना चाहिए। उन्होंने बुराइयां त्यागकर अच्छाई ग्रहण करने का अह्वान लोगों से किया।
हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं पर भी प्रकाश डाला। विशेष दुआ से पहले सहारनपुर से आए हाजी तुफैल अहमद ने कहा कि दुनिया एक मेला है और इंसान पानी के बुलबुले की तरह हैं। कई और विद्वानों ने भी विचार रखे।
इस दौरान मुफ्ती मकसूद हसन, मुफ्ती रियासत अली, मौलाना मोहम्मद आरिफ, मौलाना शमीम अहमद, डॉ. तनवीर अहमद, डॉ. नदीम आलम, हाजी रशीद, डॉ. मोईन, विधायक फुरकान समेत बड़ी संख्या में लोगों ने अकीदतमंदों की सेवा की।
दुआ के समय डबडबा गई आंखें
इज्तमा के दौरान जब विशेष दुआ हुई तो हर अकीदतमंद की आंखों में आंसू भर आए। सभी ने हाथ उठाकर अल्लाह से दुआ की कि उनसे कोई गलत काम न हो। उनका जीवन दूसरों की भलाई में बीते।
165 निकाह कराए गए
165 जोड़ों के लिए यह इज्तमा जीवन भर के लिए यादगार हो गया। आयोजकों की तरफ से 165 जोड़ों के निकाह इज्तमा स्थल पर ही कराए गए। इस दौरान उनके परिजन भी मौके पर मौजूद रहे। इज्तमा में आए विद्वानों ने निकाह करने वाले युवाओं को आर्शीवाद दिया।
अब बुलंदशहर में होगा आयोजन
इज्तमा से जमाते धर्म प्रचार का संकल्प लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर निकल गई। यह जमाते देश विदेश में जाकर धर्म का प्रचार करेगी जिनमें पांच और चार महीने के साथ-साथ 40 दिन की जमाते शामिल हैं। अगला इज्तमा छह माह बाद बुंलदशहर में आयोजित होगा।