जेपी जोशी यौन शोषण प्रकरण में ब्लैकमेलिंग की आरोपी युवती, नीरज चौहान और संजय बैनजी को सोमवार कोर्ट में पेश किया गया।
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इस दौरान वॉयस रिकॉर्डिंग को लेकर बचाव और अभियोजन पक्ष की ओर से जोरदार बहस की गई। अदालत इस मामले में आठ जनवरी को फैसला सुनाएगी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रिंकी साहनी की अदालत में हुई बहस में वॉयस रिकॉर्डिंग को लेकर बचाव पक्ष की ओर से अभियोजन पक्ष के उस प्रार्थना पत्र को खारिज किए जाने को कहा गया जिसमें फोरेंसिक जांच के लिए इसे जरूरी बताया गया है।
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बचाव पक्ष ने कहा कि अभियोजन पक्ष बताए कि उन्होंने क्या रिकॉर्ड किया है, जिसकी जांच की जा रही है। अभियोजन पक्ष की ओर से इसका विरोध किया गया।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी जगपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले आईओ ने जो जांच की उसमें आरोपियों के बीच आपस में बात हुई है। यह जरूरी नहीं है कि वॉयस रिकॉर्डिंग आरोपियों के खिलाफ हो या उनके फेवर में जाए।
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यदि बचाव पक्ष रिकॉर्डिंग से मना करता है तो इसे लिखित में दिया जाना चाहिए। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए वॉयस रिकार्डिंग जरूरी है। सहायक अभियोजन अधिकारी हरजीत कौर ने कहा कि अभियुक्त न्यायिक अभिरक्षा में हैं। ऐसे में कोर्ट से अनुमति लेकर वॉयस रिकॉर्डिंग की जा सकती है।
जेल में आरोपियों की टोह ले रही एलआईयू
यौन शोषण प्रकरण में सुद्घोवाला जेल में बंद आरोपियों पर स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) लगातार नजर रख रही है। इसके तहत जेल में रोजाना एलआईयूकर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है।
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नौकरी का झांसा देकर दुराचार और ब्लैकमेलिंग के आरोप में दर्ज दो मुकदमों में निलंबित अपर सचिव जेपी जोशी, संयुक्त सचिव सुमन सिंह वल्दिया, कांग्रेस की निष्कासित नेता रितु कंडियाल, आरोपी टीवी पत्रकार संजय बनर्जी, नीरज चौहान और पीड़ित युवती सुद्घोवाला जेल में हैं।
सूत्रों के अनुसार, एक ही जेल में होने से मुकदमे के प्रभावित होने के मद्दनजर एलआईयू उनकी गतिविधियों की टोह ले रही है।