हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब प्रदेश सरकार भी सख्त हो गई है। अब अगर आपने गंगा यमुना या फिर किसी भी नदी में ऐसा किया तो आपको जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
गंगा और यमुना में बढ़ते प्रदूषण से चिंतित हाईकोर्ट ने दोनों नदियों को नागरिक का दर्जा दिया है। इसके अनुसार दोनों नदियों को वह सभी अधिकार प्राप्त होंगे, जो एक सामान्य नागरिक को प्राप्त हैं।
अब नदियों में गंदगी डालने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी। वहीं गंदगी और प्रदूषण फैलाने के दोषियों को जेल भी हो सकेगी। नदियों की दशा में सुधार को लेकर इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।
कानून के जानकारों की माने तो यह अपनी तरह का फैसला है, जिसको बिना फैसला पढ़े परिभाषित नहीं किया जा सकता। किसी भी वस्तु को अगर जीवित का दर्जा दिया जाता है तो वह संविधान के तहत हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का हकदार है।
उसके जीवन के लिए खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा में मुकदमा पंजीकृत हो सकता है। हालांकि यह तय करना होगा कि गंगा यमुना को प्रदूषित करने वाले अलग अलग पैरामीटर को अपराध की किस किस श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
देहरादून के पूर्व जिला जज राम सिंह बताते हैं कि अब इन नदियों पर कचरा फेंका गया तो यह माना जाएगा कि किसी व्यक्ति पर कचरा डाला गया है। किसी व्यक्ति के अधिकार की तरह इन नदियों का अधिकार होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राघव इसे एतिहासिक फैसला बताते हुए कहते हैं कि आस्था से जुड़ी इन नदियों के मामले में अब स्थानीय अदालतें संज्ञान ले सकेंगी। वही कोई भी व्यक्ति यदि शिकायत करता है तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है।