उत्तराखंड में सर्दी इस बार अपना कहर बरपा रही है। कुमाऊं में बर्फ में पैर फिसलने से दो और लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही पिछले छह दिन में कुमाऊं में ठंड और बर्फ में फिसलने से 23 लोगों की जान जा चुकी है।
बागेश्वर के एसपी एनएस नपलच्याल ने बताया कि मदन सिंह (42) पुत्र विशन सिंह कमेड़ीदेवी पुलिस चौकी अंतर्गत सनगाड़ गांव में रहता था। उसका एक घर बास्ती गांव में भी है। 15 दिसंबर को वह मां से मिलने बास्ती जा रहा था।
रास्ते में उसका पांव फिसल गया और वह खाई में जा गिरा। शनिवार को बर्फ पिघलने पर खाई में उसका शव दिखाई दिया। पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
इधर, सौनी निवासी कौस्तुभानंद उपाध्याय (47) पुत्र स्व. विष्णु दत्त उपाध्याय बिनसर महादेव मंदिर (रानीखेत) में मजदूरी करता था। बृहस्पतिवार की देर शाम काम खत्म करने के बाद वह मंदिर से पैदल घर आ रहा था कि उसका बर्फ में पैर फिसर गया और वह खाई में गिर गया।
शुक्रवार सुबह ग्रामीणों को उसका शव खाई में पड़ा मिला। कौस्तुभानंद के चचेरे भाई शिक्षक जगदीश उपाध्याय ने बताया कि कौस्तुभानंद की दो पुत्रियां और एक पुत्र है। बूढ़ी मां भी घर पर हैं। सभी का रो रोकर बुरा हाल है।
10 सालों में सबसे ठंडा रहा शनिवार
शीतलहर के चलते शनिवार को हल्द्वानी का अधिकतम तापमान लुढ़ककर 11.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो पिछले दस सालों में सबसे कम रिकॉर्ड हुआ। या यूं कहें शनिवार पिछले 10 सालों में सबसे ठंडा रहा।
कोहरे और हांड़कंपाती ठंड से लोग घरों में दुबके रहे। मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को अधिकतम तापमान 16.8 डिग्री सेल्सियस था। शनिवार को अधिकमत तापमान में 5.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। वहीं पिथौरागढ़ में न्यूनतम तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई।
शनिवार को यहां का न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस रहा। मुनस्यारी में अभी भी न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे है। मौसम विभाग ने ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात की संभावना जताई है।
बागेश्वर में छठे दिन बहाल हुई बिजली
आखिरकार जिले में छठे दिन बिजली आपूर्ति बहाल हो गई। अलबत्ता, अल्मोड़ा जिले के सैकड़ों गांवों हफ्तेभर बाद भी बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई है। इधर, महाकाली के जमने से शारदा का जलस्तर कम हो गया है।
शनिवार को इसका जलस्तर 3816 क्यूसेक पहुंच गया, जो शुक्रवार को 4088 क्यूसेक था। शारदा का जलस्तर घटने से एनएचपीसी के बिजली उत्पादन पर भी दो मेगावाट का असर पड़ा है। पहले जहां 30 से 32 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था वह अब 28 से 30 मेगावट में सिमट गया है।
उपासना एक्सप्रेस हुई 11 घंटे लेट
हरिद्वार में कोहर की मार ट्रेनों के संचालन पर भी पड़ रही है। हावड़ा से देहरादून के बीच चलने वाली उपासना एक्सप्रेस (12327) 11 घंटे लेट हैं। ट्रेन का हरिद्वार पहुंचने का समय शाम तीन बजकर 55 मिनट है। ट्रेन के रात तीन बजे हरिद्वार पहुंचने की संभावना है।
जबकि वापसी में हावड़ा जाने वाली उपासना (12328) भी घंटों होकर रविवार सुबह ही हरिद्वार पहुंच पाएंगी। वहीं इलाहाबाद से देहरादून तक चलने वाली लिंक एक्सप्रेस भी नौ घंटे लेट चल रही है। यह ट्रेन सुबह 11:03 पर हरिद्वार पहुंचती है।
ट्रेन के लेट होने से देहरादून से काठगोदाम के बीच चलने वाली काठगोदाम एक्सप्रेस भी हरिद्वार घंटों लेट पहुंचेगी। ऋषिकेश से बांदीकुई के बीच चलने वाली ऋषिकेश एक्सप्रेस भी चार घंटे की देरी से शाम पांच बजे पहुंची। यह ट्रेन यहां दोपहर 12:40 बजे पहुंचती है। वहीं गोरखपुर एक्सप्रेस दो घंटे लेट से दो बजे पहुंची। यह ट्रेन यहां दोपहर 11:50 बजे पहुंचती है।
स्टेशन पर ठिठुरते हैं यात्री
शहर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, बावजूद रेलवे प्रशासन की ओर से यात्रियों को ठंड से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्रियों को कड़ाके ठंड में रहना पड़ रहा है।
वेटिंग रूम में भी हीटर का इंतजाम नहीं किया गया है। जबकि गत वर्षों में यहां रूम हीटर का इंतजाम किया जाता था। रेलवे प्रशासन की ओर से स्टेशन के गेट की ओर भी अलाव जलाने के लिए नगर निगम प्रशासन से भी संपर्क नहीं किया गया है।
बढ़ी कोयले और हीटरों की डिमांड
हरिद्वार में हालिया दिनों में बारिश के बाद जाड़े ने जोर पकड़ा तो हीटर खरीदने वालों संख्या बढ़ने लगी है। बाजार में अलग-अलग नामचीन कंपनियों और चाइनीज कंपनियों के हीटर ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।
700 से लेकर 36 हजार रुपए तक के हीटर मौजूद हैं। इलेक्ट्रानिक दुकान के संचालक कौशल तनेजा ने कहा कि सर्दी बढ़ने के साथ ही हीटर की बिक्री बढ़ी है। बाजार में चाइनीज हीटर भी हैं, लेकिन यह ज्यादा नहीं चलते।
कोयला की दुकानों पर भी अन्य दिनों के मुकाबले खरीदारी बढ़ा है। दुकान पर कोयला खरीदने आए शिवमूर्ति गली निवासी भीम सिंह रावत ने कहा धूप नहीं निकलने से ठंड अधिक हो रही है। ऐसे में कोयले की मांग बढ़ी है।