दवा देने में भले सुस्ती बरती हो, लेकिन मरीज की मौत होते ही उत्तराखंड का स्वास्थ्य महकमा हरकत में आकर इसे दबाने की कोशिश में जुट गया है। रुड़की निवासी स्वाइन फ्लू पीड़ित महिला की मौत में स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पताल की लापरवाही सामने आई है।
अस्पताल में भर्ती इस महिला को बिना दवा के घर जाने दिया गया, जबकि सूचना के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने महिला की जानकारी जुटाना जरूरी नहीं समझा। दवा न मिलने के कारण दूसरे दिन ही महिला ने दम तोड़ दिया। स्वाइन फ्लू पर स्वास्थ्य महकमा शुरुआत से ही लापरवाह बना है।
दो महीने में इस घातक रोग के प्रारंभिक लक्षणों वाले कई मरीजों के अस्पतालों में पहुंचने के बावजूद विभाग लापरवाह बना रहा। कुछ मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद विभाग को दवा खरीदने की सुध आई।
लेकिन ऐन वक्त पर आर्डर करने से दवा निर्माता कंपनियों ने भी दवा ‘टेमी फ्लू’ की आपूर्ति करने में असमर्थता जता दी। ऐसे में कई दिन तक विभाग दवा विक्रेताओं से खरीद करता रहा या निजी अस्पतालों से व्यवस्था की गई।
एक माह बाद किसी तरह दवाएं स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची, लेकिन इसके बाद भी सुस्ती नहीं टूटी। अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दवा उपलब्ध कराने के बजाय विभाग हाथ पर हाथ बांधे बैठा रहा। रुड़की निवासी स्वाइन फ्लू पीड़ित महिला की मौत इसी लापरवाही का नतीजा है। यह महिला कई दिन से जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल में भर्ती थी।
स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में यह जानकारी थी। इसके बावजूद महिला को अस्पताल से दवा दिए बिना घर जाने दिया गया। दवा नहीं मिली तो एक दिन बाद ही महिला ने बीमारी की वजह से दम तोड़ दिया। हैरत की बात यह है कि इसके बाद भी विभाग ने महिला के परिजनों को दवा देने के बजाय दो दिन तक मामले को दबाए रखने में पूरी ताकत झोंक दी।
इलाज नहीं तो मौत पक्की
स्वाइन फ्लू के मरीज का इलाज बीमारी का पता चलते ही शुरू करना जरूरी है। समय से दवा न मिलने पर फ्लू बिगड़ जाता है, जिससे मरीज की मौत होने का पूरा खतरा रहता है। गांव पनियाला, रुड़की निवासी महिला की मौत की वजह भी समय से इलाज न मिलना बताई जा रही है।
स्वाइन फ्लू के नोडल अफसर डॉ. प्रवीण पंवार के मुताबिक प्रारंभिक लक्षण मिलते ही मरीज को टेमी फ्लू दवा देनी शुरू कर देनी चाहिए। दिल्ली स्थित प्रयोगशाला से खून की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। जांच में स्वाइन फ्लू नेगेटिव भी आए तो इस दवा से मरीज को कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
कहां है जागरूकता अभियान
स्वाइन फ्लू का वायरल एक व्यक्ति से दूसरे में बड़ी तेजी से फैलता है। ऐसे में स्वाइन फ्लू पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू के खतरे और इसके संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। हां, जागरूकता अभियान चलाने के दावे जरूर किए गए। यह बात अलग है कि जमीन पर ये दावे कहीं पूरे होते नजर नहीं आए।
डॉक्टर का भी दवा खाना जरूरी
स्वाइन फ्लू के संक्रमण और इससे होने वाले खतरे का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर और दूसरे स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी स्वाइन फ्लू की दवा खानी पड़ती है।
मरीज के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को फ्लू फैलने की संभावना के मद्देनजर दवा देनी होती है। स्वाइन फ्लू से पीड़ित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर अलग से बने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर तत्काल इलाज शुरू करना चाहिए।
सुलगते सवाल
- प्राथमिक लक्षण दिखने पर क्या महिला को स्वाइन फ्लू की दवा दी गई?
- हिमालयन अस्पताल ने महिला की जानकारी के साथ रक्त नमूने मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय को भेजे थे। विभाग ने उसी दिन महिला मरीज का फालोअप क्यों नहीं किया?
- रक्त नमूने की रिपोर्ट आने से पहले ही महिला को अस्पताल ने घर क्यों जाने दिया?
- क्या परिजन महिला को इसलिए घर ले गए, क्योंकि वे निजी अस्पताल में स्वाइन फ्लू का महंगा इलाज और महंगी दवा लेने में सक्षम नहीं थे?
- ऐसा था तो निजी अस्पताल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी?
- दून अस्पताल में सरकार ने स्वाइन फ्लू के मरीजों को मुफ्त इलाज की व्यवस्था की है। पीड़ित महिला को दून अस्पताल रेफर क्यों नहीं किया गया?
- महिला के स्वाइन फ्लू के लक्षण होने के बावजूद निजी अस्पताल ने बिना स्वास्थ्य विभाग को सूचित किए महिला को क्यों ले जाने दिया?
- महिला की मौत पर दो दिन तक हरिद्वार और देहरादून जिला स्वास्थ्य विभाग एक दूसरे के जिले का मामला बताकर क्यों सीमा विवाद में उलझे रहे?
- महिला की मौत की पुष्टि के बावजूद प्रभावित गांव में लोगों को जागरूक करने और तत्काल उनके रक्त के नमूने लेने की कार्रवाई के बजाए स्वास्थ्य विभाग मामले को दबाने और लीपापोती में क्यों जुटा रहा?
...तो लें डाक्टर की सलाह
नाक बहना, बुखार, जोड़ों में दर्द, आंखों में लाली छाना और पानी बहना, छींक आना, गले में दर्द आदि इस बीमारी के प्राथमिक लक्षण हैं। यदि ये लक्षण हों तो तत्काल योग्य डाक्टर को दिखाएं।
दवा न लेने पर कुछ दिन के भीतर निमोनिया और फिर फेफड़ों में पानी भरने के साथ सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। समय पर इलाज न मिलने से मरीज की मौत भी हो सकती है। इसलिए लापरवाही कतई न बरतें।
संक्रमण से बचाएं
- स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें
- छींकते समय मुंह को रुमाल से ढक लें
- इस तरह के लक्षण वाले व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें
स्वाइन फ्लू पीड़ित महिला की मौत की पुष्टि हुई है। महिला के परिजनों और गांव के लोगों के रक्त नमूने दिल्ली प्रयोगशाला भेजे गए हैं। सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को लोगों को फ्लू के प्रति जागरूक करने के निर्देश पहले ही दे दिए गए थे। सभी सरकारी अस्पतालों को दवा भेज दी गई है।
- डॉ. जीएस जोशी, स्वास्थ्य महानिदेशक