राजधानी देहरादून में डेंगू के डंक ने पहली जान ले ही ली। 12 वर्षीय बालिका ने निजी अस्पताल में एक सप्ताह तक चले उपचार के बाद दम तोड़ दिया।
उधर, स्वास्थ्य विभाग में इस खुलासे के बाद हड़कंप मचा है। डेंगू पर नियंत्रण के दावे कर रहा विभाग अब लीपापोती में जुट गया है। कांवली रोड निवासी 12 वर्षीय हरप्रीत कौर को परिजनों ने तेज बुखार होने पर 20 अक्तूबर को सीएमआई अस्पताल में दिखाया।
गंभीर स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर लिया। खून की जांच में डेंगू की पुष्टि होने पर बच्ची को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था, जहां अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव श्रीवास्तव और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. विमल नौटियाल इलाज कर रहे थे।
हैमरेजिक डेंगू से पीड़ित थी बच्ची
डॉक्टरों का कहना है कि हरप्रीत के खून में लगातार प्लेटलेट्स की मात्रा घट रही थी। सोमवार शाम बच्ची की मौत हो गई। डॉ. नौटियाल ने बच्ची की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि बच्ची हैमरेजिक डेंगू से पीड़ित थी।
बताया कि डेंगू से स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दे दी गई है। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसपी अग्रवाल का कहना है कि जिले में अब तक डेंगू से किसी की मौत की सूचना उनके पास नहीं है।
उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग दून अस्पताल या हिमालयन इंस्टीट्यूट अस्पताल जौलीग्रांट की रिपोर्ट को ही प्रामाणिक मानता है।
डेंगू के लक्षण
तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के नीचे दर्द, चिड़चिड़ापन, बेचैनी सामान्य डेंगू बुखार के लक्षण हैं। हैमरेजिक डेंगू में मसूढ़ों, फेफड़ों, नाक, यूरिन में खून निकलने लगता है। शरीर पर लाल चकत्ते दिखाई देते हैं।
ये है बचाव और उपचार
डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है और शाम के वक्त काटता है। दून अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डा. एसडी जोशी के मुताबिक, डेंगू के लक्षण दिखने पर खुद दवा न लें।
बुखार वगैरह में दी जाने वाली दवाओं से कई बार प्लेटलेट्स घटने लगती है। तत्काल योग्य चिकित्सक की सलाह लें। डेंगू का मच्छर न पनपे, इसके लिए दफ्तर और घर के आसपास, फ्रीज, कूलर, एसी आदि में पानी जमा न होने दें।
200 से अधिक को हुआ डेंगू
दून में अब तक दो सौ से ज्यादा लोगों को डेंगू हो चुका है। सबसे ज्यादा मामले संजय कालोनी, आजाद कालोनी, भगत सिंह कालोनी आदि क्षेत्रों से आए हैं।
यहां कुछ दिन स्वास्थ्य विभाग ने फॉगिंग की और कैंप लगाकर दवाएं भी वितरित की, लेकिन अब अभियान ठप है। डाक्टरों का कहना है कि हालांकि अब डेंगू मच्छर का प्रकोप कम हो रहा है, फिर भी सावधानी बरतने की जरूरत है।