आपदा में लापता हुए लोगों को मृत्यु प्रमाणपत्र दिशा-निर्देश के मुताबिक कम से कम तीस दिन बाद जारी हो सकेंगे।
कानूनी पहलुओं और गड़बड़ी से बचने के लिए रजिस्ट्रार जनरल ने कड़े प्रावधान तय किये हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्र के एसडीएम ही मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करेंगे।
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चार धाम यात्रा के दौरान केदारघाटी और कई अन्य क्षेत्रों में हजारों लोग जल प्रलय का शिकार हुए थे। दो सितंबर को राज्य के सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के अलावा अन्य राज्यों को भी शासन ने प्रमाणपत्र जारी करने के लिए निर्देश जारी कर दिए।
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इसमें लापता लोगों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिस क्षेत्र में आपदा आई है वहां के स्थानीय लोगों को पहली श्रेणी में रखा गया है। राज्य के अन्य जनपदों के ऐसे लापता लोगों को दूसरी श्रेणी में रखा है जो प्रभावित क्षेत्र में लापता हुए हैं। जबकि तीसरी श्रेणी अन्य राज्यों के लापता लोगों की है।
प्रक्रिया
- लापता का उत्तराधिकारी अपने क्षेत्र के थाने में एफआईआर दर्ज करवाएगा।
- वहां के एसडीएम को एफआईआर की कॉपी सहित अन्य दस्तावेज देने होंगे।
- हादसे के समय लापता के चार धाम यात्रा में मौजूद होने का सबूत देना होगा। इसमें फोन कॉल का रिकॉर्ड, फोटो, ट्रेवलिंग एजेंसी की रसीद आदि शामिल है।
- एसडीएम लापता व्यक्ति के दस्तावेज आपदा वाले क्षेत्र के एसडीएम को भेजेगा।
- दस्तावेजों के सत्यापन के लिए मिसिंग सेल की मदद ली जाएगी।
- परगना अधिकारी की ओर से लापता व्यक्तियों की सूची अखबार, वेबसाइट और अन्य प्रचार माध्यम से प्रकाशित की जाएगी।
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