भई पुरुष्कार इंसान को गौरवान्वित करता है यह तो आपने कई दफा सुना होगा, लेकिन यहां मामला उलट है, पुरष्कार न मिलने से लोग चितिंत हैं।
लोग कई दिन से चिंतित हैं। चिंता का सबब हैं शहर के जाने-पहचाने साहित्यकार महोदय। उनका अब तक का रिकार्ड है कि हर डेढ़ माह में दो पुरस्कार किसी ने किसी संस्था के मार्फत उनके खाते में जाते हैं।
लोग चिंतित इसलिए हैं कि इस दफा तीन माह गुजरे साहित्यकार महोदय को कोई पुरस्कार मिलने की सूचना नहीं आई। कई लोगों ने उनके मोबाइल पर फोन करके कुशलता भी जानी। उन्होंने कुशल-क्षेम बताई, लेकिन पुरस्कार पर नहीं आए।
किसी की पूछने की हिम्मत भी नहीं हुई। हाल ही में हुई एक गोष्ठी में साहित्यकार के पिछले तीन माह से नए पुरस्कार से वंचित होने की चिंता मुखर होकर उभरी।
कुछ ने तो बाकायदा एक सभा कर इस संबंध में अज्ञात संस्थाओं के खिलाफ निंदा प्रस्ताव का भी विचार रखा है। अब इंतजार इस सभा का है।