कोरोना काल की शुरुआत में गरीबों को बांटे गए निशुल्क राशन पर आए खर्च का भुगतान नहीं होने से राशन डीलरों में गुस्सा पनप रहा है। डीलरों ने सीएम को ज्ञापन भेजकर राशन बांटने में ढुलाई, मजदूरी और पल्लेदारी पर आए खर्च का भुगतान करने की मांग की है। साथ ही भुगतान न होने तक डीलरों ने जुलाई का राशन बांटने से इनकार कर दिया है।
कोरोना संक्रमण फैलने के बाद सरकार ने राशन डीलरों को अप्रैल महीने से गरीब परिवारों को निशुल्क गेहूं और चावल बांटने के आदेश दिए थे। यह निशुल्क चावल भी राशन डीलरों को अपनी दुकानों से वितरित करना था। इसी के साथ राशन डीलरों ने एसएमआई गोदाम से राशन उठाकर दुकान तक पहुंचाया था। इसपर डीलर को मजदूरी, ढुलाई और पल्लेदारी आदि पर पैसा खर्च करना पड़ा था, जिसका वहन सरकार को करना था। डीलरों ने राशन तो बांट दिया, लेकिन अभी तक उनका भुगतान नहीं किया गया है। इससे राशन डीलरों में गहरी नाराजगी है।
डीलरों ने इस बाबत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर भुगतान देने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उनका भुगतान नहीं हो जाता, वह राशन नहीं उठाएंगे। साथ ही उन्होंने निशुल्क राशन वितरण पर भी कमीशन देने, दुकानों को हर पंद्रह दिन के भीतर सैनिटाइज कराने व डीलरों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने की मांग की है। पत्र भेजने वालों में राशन डीलरों के नेता राजेश कुमार, मेनपाल सिंह, रियाजुल, वेदपाल, विनोद कुमार, नेत्रपाल, नवाब अली, राकेश कुमार, सोविंद्र, राजवीर, संजय सैनी, चौधरी जोधसिंह, जयपाल, दिलशाद, सुलेमान और विशाल आदि शामिल थे।