आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया डेयर डेविल अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि पर्वतारोहियों के शवों को पूरे सम्मान के साथ लाया जा रहा है। डीआईजी के अनुसार एक शव का भार 80 से 90 किलो तक है। कठिन दर्रों और बर्फ में जवानों ने अभी तक इस काम को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने बताया कि पर्वतारोहियों के शवों को निकालने में जो तकनीक अपनाई जा रही है वह विश्व का अपनी तरह का पहला अभियान है।
यह है मामला
13 मई को मुनस्यारी से नंदादेवी ईस्ट के लिए गए ब्रिटेन निवासी मार्टिन मोरिन, जोन चार्लिस मैकलर्न, रिचर्ड प्याने, रूपर्ट वेवैल, अमेरिका के एंथोनी सुडेकम, रोनाल्ड बीमेल, आस्ट्रेलिया की महिला पर्वतारोही रूथ मैकन्स और इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडेय पर्वतारोहण के दौरान एवलांच की चपेट में आने से लापता हो गए थे। आईटीबीपी के द्वितीय कमान अधिकारी और एवरेस्ट विजेता रतन सिंह सोनाल के नेतृत्व में गई 18 सदस्यीय हिमवीरों की टीम ने 23 जून को सात पर्वतारोहियों के शवों को निकालकर 17800 फीट की ऊंचाई पर अस्थाई कैंप में रखा था।