राजाजी राष्ट्रीय पार्क टाइगर रिजर्व में गुर्जर पुनर्वास के नाम पर मुआवजे के लिए मृतक वन गुर्जर को भी जिंदा दर्शा दिया गया है।
किसी वन गुर्जर की दो तो किसी की तीन साल पहले मौत हो चुकी है, इसके बावजूद पार्क प्रशासन की ओर से ऐसे वन गुर्जरों के नाम से निकासी चालान जारी किए जा रहे हैं। जिससे पार्क के कुछ अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
राजाजी राष्ट्रीय पार्क में वन गुर्जरों के गलत तथ्यों के आधार पर आधार कार्ड बनाने, 277 अपात्र गुर्जरों को पुनर्वास के नाम पर हजारों बीघा जमीन आवंटित करने और अन्य वन गुर्जरों को पुनर्वास के नाम पर भूमि आवंटित किए जाने के बावजूद कई वन गुर्जरों के प्रतिबंधित पार्क क्षेत्र में बसे होने के मामले के बाद अब एक नया मामला सामने आया है।
राजाजी राष्ट्रीय पार्क के अधिकारियों की ओर से ऐसे वन गुर्जरों को निकासी चालान जारी किया गया है जिसकी दो से तीन साल पहले मौत हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि निकासी चालान में मर चुके वन गुर्जरों के अंगूठे के निशान भी लिए गए हैं। अधिकारियों की ओर से मृतक वन गुर्जरों का सत्यापन कर उनका निकासी चालान जारी किया गया है।
वन आरक्षी हरिवंत नैनवाल गूर्जर पुनर्वास गैंडीखाता की नौ मई दी गई 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक वन गुर्जर लाली पुत्र हसनबीबी की तीन साल पहले मौत हो चुकी है। उसका चिल्लावाली बीट से गैंडीखत्ता पुनर्वास केंद्र के लिए निकासी चालान जारी किया गया है। चालान में दर्शाया गया है कि यह वन गुर्जर चिल्लावाली बीट से सामान लेकर गैंडीखाता पुनर्वास केंद्र जा रहा है।
हसनदीन पुत्र बीबीहसन और फिरोज पुत्र रणबक्स की मौत हो चुकी है। वन आरक्षी की रिपोर्ट के मुताबिक हसनदीन की दो साल पहले मौत हो चुकी है, लेकिन इनका भी चिल्लावाली बीट से गैंडीखाता पुनर्वास केंद्र के लिए निकासी चालान जारी किया गया है।
जो मर चुका है वह अंगूठा कैसे लगा सकता है, लेकिन इस तरह के वन गुर्जरों के निकासी चालान जारी कर दिए गए हैं। इन वन गुर्जरों को चिल्लावाली से गैंडीखाता जाना दर्शाया गया है। डायरेक्टर राजाजी टाइगर रिजर्व को इसकी रिपोर्ट भेजी गई है।
- धीर सिंह रेंज अधिकारी गैंडीखाता
वन गुर्जरों से संबंधित प्रकरणों को लेकर बृहस्पतिवार को विभागीय अधिकारियों की बैठक होनी प्रस्तावित थी, लेकिन किन्हीं कारणों से बैठक नहीं हो पाई, जल्द बैठक बुलाई जाएगी।
- अरविंद सिंह ह्यांकी, सचिव वन विभाग