‘ये दोनों बेटियां नहीं, मेरे बेटे हैं। मैं जब भी दुनिया से जाऊंगा, मेरे ये दोनों बेटे ही मेरा अंतिम संस्कार करेंगे।’ कांग्रेस नेता देवेंद्र सेठी दो बेटियों के पिता होने के सवाल पर अकसर लोगों को यही जवाब दिया करते थे।
यही उनकी अंतिम इच्छा भी थी। कैंसर से निधन के बाद दोनों बेटियों ने सेठी की इस इच्छा को पूरा करते हुए उन्हें मुखाग्नि दी।
पिता के निधन ने सेठी की दोनों बेटियों प्रियानीत (23) और जैसमीन (20) को गहरा धक्का तो पहुंचाया, लेकिन पिता की अंतिम इच्छा पूरा करने का जिम्मा उन पर था।
पिता की अंतिम यात्रा में शामिल हुईं
आंखों से लगातार बहते आंसुओं के साथ दोनों बहनें पिता की अंतिम यात्रा में शामिल हुईं और पिता का अंतिम संस्कार पूरे विधि विधान से किया। जैसमीन और प्रियानीत ने बताया कि सेठी ने उन्हें कभी दूसरे लोगों की तरह दोयम नहीं समझा।
जैसमीन ने बताया, ‘पापा हमेशा कहते थे, तू मेरा बेटा है। बेटों की तरह ही रहा कर।’ दोनों बहनों ने पिता की दी जिम्मेदारी तो निभा ली, लेकिन उन्हें यही दुख साल रहा था कि कैंसर का दर्द झेलते सेठी ने कभी उन्हें अपनी बीमारी के बारे में नहीं बताया।
बेटियों पर भला किसे नाज नहीं
पिता आखिरी स्टेज में पहुंचे, तब उन्हें पता चला। सेठी के परिचित जितेंद्र तनेजा ने बताया कि सेठी अस्पताल में भर्ती थे तो जैसमीन और प्रियानीत हरवक्त पास खड़े रहते।
पिता दर्द से कराहते तो दोनों बोलतीं ‘पापा घबराइए नहीं, आपके दोनों बेटे यहां हैं।’ आंखों में दोस्त को खोने के गम में आंसू लिए तनेजा ने कहा ऐसी बेटियों पर भला किसे नाज नहीं होगा।