स्वाधीनता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन ने आरोप लगाया है कि थल में 20 अगस्त को समय पर इलाज नहीं मिलने से स्वाधीनता सेनानी परमल सिंह ह्यांकी की पौत्री नंदनी की मौत हो गई थी।
नंदनी को रात में सांप ने काट दिया था। उसे तत्काल गोचर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन वहां पर न तो डॉक्टर मौजूद था और न दवाइयां ही थी।
उन्होंने सेनानी की पौत्री की मौत के लिए अस्पताल की अव्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है। स्वाधीनता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सचिव राजेश मोहन उप्रेती ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पीड़ित परिवार को पांच लाख का मुआवजा दिया जाए।
उधर, सेनानी की पुत्री और मृतका की मां पार्वती देवी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि गोचर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर लापरवाह है। अस्पताल में जाने वाले हर केस को इलाज देने के बजाए सीधे रेफर कर दिया जाता है।
उन्होंने अपनी बेटी की मौत के लिए अस्पताल के कर्मचारियों को जिम्मेदार मानते हुए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि गोचर अस्पताल की दशा सुधारा जाना बेहद जरूरी है। तभी थल घाटी की 40 हजार आबादी को राहत मिल पाएगी।