‘पापा ने अंतिम समय में मुझे पास बुलाकर कहा था कि बेटा, मुझे मुखाग्नि तू ही देना।'
'यह मेरा अधिकार है'
पापा चले गए तो मैंने तय कर लिया कि उन्होंने मुझे जन्म दिया। बेहतर तरीके से पालन किया। मुझे हमेशा बेटा ही समझा तो मैं भी उनके अंतिम संस्कार का फर्ज पूरी रीति से निभाऊंगी।
यह मेरा अधिकार है और पापा की अंतिम इच्छा का सम्मान भी। यह कहते हुए रुंधे गले से शुभांका ने बताया कि छोटी होने कारण वह पापा की लाडली थी।
राजधानी के सिरमौर मार्ग, राजेंद्रनगर निवासी शुभांका गुरुवार को उन चंद बेटियों में शुमार हो गईं, जिन्होंने रूढ़ियां तोड़ पिता को मुखाग्नि दी। शुभांका के पिता ब्रह्मदत्त ठाकुर कैंसर से पीड़ित थे।
ओएसएस प्रयोगशाला में सुपरवाइजर ठाकुर का पांच साल तक चले इलाज के बाद बुधवार रात देहांत हो गया। परिवार में दो बेटियां प्रियंका, शुभांका और पत्नी शकुंतला हैं।
प्रियंका की शादी हो चुकी है, जबकि शुभांका ने हाल ही में बीएड किया है। शुभांका ने बताया कि बेटा न होने के बावजूद पापा ने कभी यह कमी महसूस नहीं की। दोनों बहनों को भी यह अहसास नहीं होने दिया।
शुभांका जब पिता की अर्थी लेकर लक्खीबाग स्थित श्मशान घाट पहुंची तो परिजनों व रिश्तेदारों ने भी उसका पूरा साथ दिया। शुभांका का चचेरा भाई भी मौजूद था, लेकिन किसी ने शुभांका का हक उसे देने की जरूरत नहीं समझी।
अब मां का रखना है ख्याल
शुभांका ने कहा कि पापा के निधन के बाद अब मां की जिम्मेदारी उस पर है। मां को कोई कमी नहीं होने दूंगी।
वह मानती है कि माता-पिता बेटी का पालन भी बेटे की तरह ही करते हैं तो उनकी देखरेख की जिम्मेदारी सिर्फ बेटे की ही क्यों समझी जाती है? बेटी को भी मां-पिता की देखभाल में भागीदारी मिलनी चाहिए।
इन्होंने भी तोड़ी रूढ़ियां
आईपीएस श्रुति अग्रवाल ने भी गत माह पिता को मुखाग्नि देकर मिसाल कायम की थी। पांच बहनों में सबसे छोटी श्रुति के पिता त्वचा कैंसर से ग्रस्त थे। दिल्ली में लंबे उपचार के बाद उनका निधन हो गया।
श्रुति ने हरिद्वार में पूरे रीति रिवाज से पिता का अंतिम संस्कार किया। श्रुति रुद्रपुर में पीएसी की 31वीं बटालियन में बतौर सेनानायक तैनात हैं।
प्रेमनगर निवासी कांग्रेस नेता देवेंद्र सेठी का गत वर्ष गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान देहांत हो गया था। वह कैंसर पीड़ित थे।
सेठी की बेटियों प्रियानीत और जैसमीन ने छह अक्तूबर 2013 को पिता का अंतिम संस्कार किया था। सेठी ने अंतिम इच्छा जताई थी कि उन्हें बेटी ही मुखाग्नि दे।