उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में भारी बर्फबारी के बाद प्रचंड ठंड का कहर जारी है। ठंड के चलते पांच और लोगों की मौत हो गई है।
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देवीधुरा, तिमलागांव के बीच एक युवक और नौमाना गांव में महिला का शव बर्फ से दबा मिला है जबकि बागेश्वर में भी ठंड ने दो लोगों की जान ली है। झूलाघाट निवासी एक हेड कांस्टेबल की भी ठंड मौत होने बताई जा रही है।
इन्हें मिलाकर कुमाऊं मडंल में ठंस से कुल 19 लोग अब तक मर चुके हैं। हिमपात के चलते पहाड़ के कई रास्ते अब भी बंद हैं। लोहाघाट-रीठासाहिब मार्ग बंद होने से 400 से अधिक तीर्थयात्री और खेतीखान में 36 से अधिक यात्री फंसे हुए हैं।
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विकास खंड पाटी में दुर्गा सिंह (42) पुत्र मोहन सिंह निवासी तिमला का शव बुधवार को बर्फ में दबा मिला। पूर्व ग्राम प्रधान गोपाल सिंह ने पाटी के नायब तहसीलदार माहरा को घटना की जानकारी दी।
दुर्गा सिंह रविवार को देवीधुरा से गांव जाते बर्फबारी की चपेट में आ गया था। बाराकोट के नौमाना गांव में भी बर्फ की चपेट में आने से दुर्गा जोशी (47) पत्नी खिलानंद जोशी की जान चली गई। उनका लोहाघाट के ऋषेश्वर घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
खतरनाक ठंड से गई कई जान
बागेश्वर में पिता की मौत के बाद दिल्ली से आ रहे युवक की मौत हो गई। तहसील क्षेत्र के ग्राम डोबा धारी गांव के राज्य आंदोलनकारी गुसांई सिंह टंगड़िया का निधन रविवार को हुआ था।
उनका पुत्र पूरन सिंह टंगड़िया (35) दिल्ली मौत की खबर पाकर सोमवार की सुबह दिल्ली से चला। उसने सोमेश्वर से गांव जाने के लिए जीप बुक कराई। रात करीब आठ बजे वह गांव से करीब तीन किमी पीछे था।
आगे बर्फबारी के कारण सड़क बंद होने से वह पैदल ही गांव को निकला। भारी ठंड के चलते वह बेहोश होने लगा तो मोबाइल से परिजनों दी इसकी जानकारी दी। वह उसे डोली से घर ले गए। जहां रात करीब एक बजे पूरन ने भी दम तोड़ दिया।
उधर बागेश्वर से करीब पांच किमी दूर बमराड़ी गांव के बहादुर राम (62) की भी ठंड लगने से मौत हो गई जबकि सीमांत तामली थाने में तैनात झूलाघाट निवासी हेड कांस्टेबल तेज सिंह पुत्र दीवान सिंह बुधवार को जिला मुख्यालय में एक कमरे में मृत के बाथरूम में मृत मिला। माना जा रहा है कि ठंड से उसकी मौत हुई है।
ये सड़कें नहीं खुल पाईं - गंगोलीहाट-बेड़ीनाग मार्ग - गुप्तड़ी-पातालभुवनेश्वर मार्ग - धारचूला-नारायण आश्रम मार्ग - कैलास मानसरोवर पैदल यात्रा मार्ग - लोहाघाट-रीठासाहिब मार्ग
चाय और पानी के लिए भी तरस गए लोग
अल्मोड़ा जिले में एक-दो दिन ही बर्फ गिरी, तो आपदा प्रबंधन की पोल खुल गई। यह स्थिति तब सामने आ आई, जब आपदा प्रबंधन के प्रदेश में एक मंत्री के अलावा दो उपमंत्री भी हैं। अल्मोड़ा में सोमवार को हुई बर्फबारी के बाद हालात यह रहे कि अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा-बेड़ीनाग मार्ग बुधवार की शाम खोला जा सका।
इन दोनों मार्गों पर हजारों यात्री और पर्यटक भूखे-प्यासे फंसे रहे। प्रशासन उनके लिए चाय और पानी का इंतजाम भी नहीं कर सका। लोगों ने अपने वाहनों में ही तीन दिन और दो रातें काटीं। खासतौर पर बच्चों और महिलाओं अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने पैदल चलने की हिम्मत जुटाई तो वे फिसलन भरे मार्गों पर गिरकर चोटिल हो गए।
हालांकि आसपास के ग्रामीण जरूर उनके लिए मसीहा बनकर आए उन्होंने अपने स्तर से लोगों की मदद की, लेकिन प्रशासनिक अमला पूरी तरह से गायब रहा। आपदा प्रबंधन टीम और क्यूआरटी दस्तों का कहीं पता नहीं है। शासन के निर्देश पर आपदा से निपटने के लिए जिले से लेकर तहसील स्तर तक आपदा प्रबंधन टीमें गठित हैं।
साथ ही पुलिस का भी क्यूआरटी दस्ता है लेकिन बर्फबारी के तीन दिन बाद भी आपदा प्रबंधन और क्यूआरटी टीमें कहीं भी नहीं दिखाई दी। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग के बर्फबारी से बंद रहने से रविवार सुबह से बाल विकास विभाग के कर्मचारी नवीन चंद्र कांडपाल का शव ले जा रहा वाहन चार दिन तक पनुवानौला के निकट फंसा रहा।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लाइनें ध्वस्त पड़ी हैं। लोगों को रोशनी करने के लिए मिट्टी तेल तक भी नहीं मिल पा रहा है। कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गई। अल्मोड़ा नगर और दन्यां क्षेत्र में पानी की सप्लाई नहीं हो सकी। लोग बर्फ का पानी उपयोग में ला रहे हैं।
बर्फबारी के बाद जनता मुसीबतों से जूझ रही है। जनता का रहनुमा होने का दावा करने वाले सत्ताधारी, विपक्ष समेत किसी भी दल के कार्यकर्ता और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं।
अल्मोड़ा-बेड़ीनाग और अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मोटर मार्ग पर दो दिन से फंसे हजारों लोगों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। कुछ ऐसा ही हाल नगर क्षेत्र का भी रहा।
पालिका के पास भारी-भरकम अमला है, पर तीन दिन बाद भी किसी भी खतरे भरे रास्ते से बर्फ नहीं हटाई गई है। वहीं पटाल बाजार में बर्फ और कूड़े के ढेर लगे हैं। कीचड़ से निकलना मुश्किल हो रहा है, पर इस ओर ध्यान किसी ने ध्यान नहीं दिया।
औली पहुंचने के लिए नहीं है कोई साधन जोशीमठ/गोपेश्वर के प्रसिद्ध हिम क्रीड़ा स्थली औली चारों तरफ से बर्फ की सफेद चादर से ढकी हुई है, लेकिन जोशीमठ-औली मार्ग और जोशीमठ-औली रोपवे बंद पडे़ होने से पर्यटक औली के दीदार नहीं कर पा रहे हैं।
औली में बर्फ पड़ने के बाद बर्फ से खेलने के लिए बड़ी संख्या में लोग औली पहुंचते थे, लेकिन इस बार औली पहुंचने के लिए कोई साधन ही नहीं है। लोग औली से पांच किमी पहले ही सुनील गांव तक पहुंचकर वापस लौट रहे हैं।