ग्लोबल वार्मिंग के कारण खिसक रहे ग्लेशियरों की वजह से उत्तराखंड की मध्य हिमालयी रेंज में झीलें बनने का क्रम तेज हो गया है जो खतरे का सबब बन सकता है।
आपदा के बाद पहाड़ों पर बनने वाली झीलों पर नजर रखी जा रही है। झीलों का डाटा बेस तैयार किया जा रहा है जिससे इनकी कायदे से मॉनीटरिंग हो सके।
मध्य हिमालयी क्षेत्र उत्तराखंड में अभी तक ग्लेशियरों के आसपास और दूसरे स्थानों पर झीलें चिन्हित की गई हैं। अलकनंदा क्षेत्र में सबसे ज्यादा चार सौ ग्लेशियर हैं। ये पांच से 10 मीटर पीछे खिसके हैं।
वाडिया भूगर्भ संस्थान ग्लेशियरों के खिसकने की वजह से बनने वाली झीलों पर काम कर रहा है। सेटेलाइट इमेजरी के माध्यम से अभी तक 1265 झीलें चिन्हित की गईं। इसके बाद इनका भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।