हर घर के लोकप्रिय खाद्य पदार्थ मैगी में मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी सीसा तय सीमा से अधिक पाए जाने के बाद देश में इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि मैगी की तरह सेहत के लिए खतरनाक दूसरे खाद्य पदार्थों और मिलावट को कौन रोकेगा?
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दूसरे नूडल्स, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, स्ट्रीट फूड और कीटनाशक के प्रयोग से उत्पादित अनाज एवं सब्जी का सेवन भी तो सेहत के लिए हानिकारक होता है। बाजार में मिलने वाला कोई भी खाद्य उत्पाद शुद्ध नहीं होता है, लेकिन सब धड़ल्ले से बिक रहे हैं। संबंधित विभाग कभी-कभी सैंपल लेकर नमूने जांच के लिए भेज देता है। कभी किसी मिलावटखोर पर बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
वर्ष 1980 के दशक की शुरुआत में स्विस कंपनी नेस्ले ने भारत में कदम रखा और नेस्ले इंडिया के खाद्य उत्पाद मैगी ने घर-घर में जगह बना ली। बेशक मैगी लोगों में लोकप्रिय होती गई, लेकिन डॉक्टर हमेशा इसके सेवन के प्रति चेताते रहे हैं। लेकिन लचर खाद्य सुरक्षा प्रणाली की वजह से न केवल मैगी बल्कि दूसरे खाद्य पदार्थ आक्रामक प्रचार की वजह से लोगों की रसोई में राज करते रहे।
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कोई भी नूडल्स खाने योग्य नहीं
डाक्टर कहते हैं कि कोई भी नूडल्स खाने योग्य नहीं होता है। इंस्टेंट नूडल्स खाने से पाचन प्रक्रिया कुछ घंटों के लिए धीमी हो जाती है। इसीलिए शरीर पोषक तत्वों को ठीक से आत्मसात नहीं कर पाता है। इंस्टेंट नूडल्स में प्रिजर्वेटिव्स और एंटीफ्रीज जैसे तत्व होते हैं, जो कैंसर पैदा कर सकते हैं।
सोडियम की अधिक मात्रा होने की वजह से गुर्दे में पथरी हो सकती है। इंस्टेंट नूडल्स में स्वाद बढ़ाने के लिए मोनोसोडियम ग्लूटामेट का इस्तेमाल किया जाता है। इससे सिर या सीने में दर्द की तकलीफ हो सकती है।
कितना खतरनाक है लेड लेड के सांस या खाने के रूप में शरीर में जाने पर स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। अधिक प्रभावित नर्वस सिस्टम होता है। पेट दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं। अंगुलियों, कलाई और पैरों के जोड़ों में कमजोरी आ सकती है।
ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। अधिक समय तक बढ़ी हुई मात्रा में लेड के शरीर में जाने से दिमाग और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। पुरुषों में नपुंसकता आ सकती है।
लेकिन लेड यहां भी तो है...
लेड यानी सीसा घर में पानी की पाइप से भी आता है। नलकूप में लगाए गए घटिया पाइप की वजह से उसमें से लेड रिसता है। काजल में लेड की कुछ मात्रा होती है। लिपस्टिक में थोड़ी मात्रा में पाया जाता है, जो होंठों पर लगाते ही त्वचा से शरीर में चला जाता है। घरों को रंगने वाले पेंट में लेड की मात्रा अधिक होती है।
जब पेंट दीवारों से निकलना शुरू होता है और उस पर गंदगी जमने लगती है तब चारों ओर की हवा में लेड रहता है। सिरेमिक की कोटिंग वाले बर्तनों को बनाते वक्त लेड का प्रयोग किया जाता है।
सब्जियों और मछली में भी लेड जिस जमीन में सब्जियां उगाई जाती हैं, वहां भी भारी मात्रा में लेड मौजूद रहता है। कारखानों से निकलने वाले कूड़े और पानी में ढेर सारा लेड निकलता है, जो नदियों और नहरों में मिलता है। इन नदियों में मछलियां होती हैं, जिनके शरीर में पानी के साथ लेड चला जाता है।
..और मिलावट कहां नहीं? बाजार में मसाले से लेकर दाल, चावल, आटा, तेल, वनस्पति एवं देसी घी में भी मिलावट की जाती है। मिलावटखोर खाद्य पदार्थों में विभिन्न तरह के खतरनाक पदार्थ और रसायन मिलाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हैं।
कृषि उत्पाद भी खतरनाक! कीटनाशकों और रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग की वजह से खेतों में पैदा होने वाला अनाज और सब्जियां सेहत के लिए हानिकारक हो गए हैं। नदी के किनारे होने वाली फसलें भी प्रदूषित पानी की सिंचाई की वजह से हानिकारक होती हैं।
मैगी मैदे से बनती है। इसलिए सेहत के लिए हानिकारक होती है। जो लोग इसे निरंतर खाते हैं, उन्हें पेट संबंधी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं। लेकिन दूसरे नूडल्स, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, मिलावटी खाद्य वस्तुएं और हलवाई की मिठाइयां एवं सड़क के किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थ भी सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं। - डॉ. महावीर, फिजीशियन, दून अस्पताल
लेड की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों को लगातार और लंबे समय तक सेवन करने से आदमी की सूझबूझ पर असर पड़ने लगता है। बच्चों पर इसका जल्दी प्रभाव पड़ता है। चिप्स आदि दूसरे पैकेट बंद खाद्य पदार्थ भी सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। स्ट्रीट फूड का सेवन भी सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। - डॉ. अमित वर्मा, विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल
खाद्य पदार्थों की उचित निगरानी नहीं उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों की निगरानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। होली-दिवाली पर भले ही खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग होती है, लेकिन उससे पहले और बीच में खाद्य सुरक्षा विभाग बाजार से किसी खाद्य पदार्थ का सैंपल नहीं लेता।
यही वजह है कि मिलावटी और गुणवत्ता विहीन खाद्य उत्पाद, मिठाइयां और चाट-समोसे खाकर लोग अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। सही निगरानी व्यवस्था बनाकर ही लोगों को बीमार पड़ने से रोका जा सकता है।