फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गंगोत्री पर खतरा, नदी के बीच में आया मलबा

Wed, 28 May 2014 06:46 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
गोमुख की ओर अपस्ट्रीम में भागीरथी के दोनों ओर भूस्खलन के बढ़ते दायरे तथा देवऋषि गदेरे में चट्टानी मलबा आने की शुरुआत होने से अब बरसात में भागीरथी का प्रवाह अवरुद्ध होकर कभी भी गंगोत्री में तबाही मचा सकता है।
विज्ञापन


बीते साल जून में यहां आए मलबे ने कुछ क्षण भागीरथी का प्रवाह रोककर तटवर्ती हिस्सों में तबाही मचाई थी।

वन विभाग को इस चट्टानी हिस्से में सिर्फ कच्ची बटिया तैयार करने में ही तीन लाख रुपये खर्च करने पड़े।

मलबे से पिछले साल मची थी भारी तबाही

भैरोंझाप नाले तथा केदार गंगा से कटाव के खतरे से जूझ रहे गंगोत्री तीर्थधाम में अब देवऋषि गदेरे ने लोगों की नींद उड़ाकर रख दी है।

बीते साल 16 जून को मलबे की चपेट में आने से कई साधुओं की गुफाओं और स्वामी वेदांतानंद के घाट समेत दो किमी के दायरे में बोल्डरों ने भारी तबाही मचाई थी।

यही नहीं गोमुख की ओर भागीरथी के दोनों ओर भारी भूस्खलन सक्रिय हो गए हैं। गंगोत्री-गोमुख ट्रैक पर तीन किमी क्षेत्र में कच्चा ढांग और इससे पहले देवढांग में मलबा भागीरथी में गिरता रहता है।

...तो ऐसे आएगी तबाही

जानकारों के अनुसार पहले इस क्षेत्र में बारिश की हल्की फुहार ही देखने को मिलती थी, लेकिन बीते दो सालों से इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में मूसलाधार बारिश ने भूस्खलन की तीव्रता बढ़ाने का काम किया है।

गंगोत्री से एक किमी गोमुख की ओर देवऋषि गदेरे का मलबा भागीरथी में जमा है। यदि बरसात में इस गदेरे में फिर मलबा आया तो इससे भागीरथी के अवरुद्ध होने से डाउन स्ट्रीम में गंगोत्री की ओर तबाही का खतरा है।

अभी तक आपदा प्रबंधन के नाम पर गंगोत्री पर मंडरा रहे इस खतरे को टालने की कोई पहल सामने नहीं आई है।
विज्ञापन

80 डिग्री खड़े ढाल से आ रहा मलबा

देवऋषि गदेरे के पास गुफा में वर्षों से रह रहे स्वामी राजाराम दास, गंगोत्री साधु सभा के सचिव ब्रह्मचारी अनिल स्वरूप तथा गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष भागेश्वर प्रसाद सेमवाल का कहना है कि गंगोत्री पहले ही भैरोंझाप नाले में जमा मलबे और केदार गंगा के कटाव से खतरे में है।

अब देवऋषि गदेरे में 80 डिग्री ढाल वाली पहाड़ी से आ रहे भारी पत्थरों के मलबे ने भागीरथी पर झील बनने का खतरा बढ़ा दिया है।

सरकारी स्तर पर अभी तक इस खतरे को टालने के लिए प्रयास तो दूर अभी तक खतरे की पड़ताल कराने की जहमत तक नहीं उठाई गई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें