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टिहरी झील से उत्तराखंड के गांवों में पड़ी दरारें

Thu, 13 Nov 2014 02:25 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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टिहरी बांध के भूकंप की दृष्टि से बेशक सुरक्षित होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन इसके जलाशय की वजह से कई गांवों के लिए मुश्किल बढ़ गई है। भिलंगना ब्लाक का खांड गांव ऐसा ही गांव है, जहां दरारें बढ़ गई हैं। रौलाकोट में भी यही स्थिति है।
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भू-तकनीकी दिक्कतों के बारे में बताया
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के विशेषज्ञ एच बहुगुणा ने बुधवार को टिहरी रिजरवायर से जुड़ी भू-तकनीकी दिक्कतों पर रोशनी डाली। प्रेजेंटेशन के माध्यम से इन्हें विस्तार से बताया।

नेशनल सोसायटी ऑफ इंजीनियरिंग जियोलाजी (एनएसईजी) के जियो टेक्निकल प्रोग्राम के तीसरे और आखिरी दिन सुभाष रोड स्थित एक होटल के कांफ्रेंस रूम में विशेषज्ञों के समक्ष अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कई गांव ऐसे हैं।
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जो तकरीबन 24-25 साल पहले यानी सन् 89, 90, 91 में टिहरी जलाशय के संबंध में किए गए सर्वे में पुनर्वास की परिभाषा में नहीं आए थे, लेकिन अब स्थिति यह हो गई है कि इनका पुनर्वास बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे गांवों की संख्या और नाम बताने से हालांकि उन्होंने परहेज बरता।
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